प्रेसवार्ता कर जानकारी देती विधायक पत्नी
-भाजपा के चुनार विधायक अनुराग सिंह की पत्नी डा. स्नेहलता ने रामदुलारी के आरोपों को बताया आधारहीन व तथ्यहीनमीरजापुर,हिन्दुस्तान की आवाज, संतोष देव गिरी
मीरजापुर। जिले के चुनार विधायक अनुराग सिंह ने जमीन हड़ने के लगाये गए आरोपों को बेबुनियाद तथा आधारधीन बताते हुए स्वयं की छवि को धूमिल किए जाने की सोची समझी साजिश करार दिया है तो वहीं भाजपा विधायक की पत्नी ने मीडिया के सम्मुख इस पूरे प्रकरण को पूरी दमदारी के साथ रखते हुए अपने विधायक पति पर लगाये गए आरोपों को पूरी तरह से आधारहीन, तथ्यहीन बताते हुए सारे साक्ष्य मीडिया के समक्ष रखते हुए इसे साजिश करार दिया है। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले से वह और उनका परिवार बुरी तरह से आहत है। इस लिए उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए न केवल विधि संगत कार्रवाई का मन बनाया है, बल्कि विरोधियों पर मानहानि का मुकदमा भी ठोंक दिया है। चुनार विधायक अनुराग सिंह की पत्नी डा. स्नेहलता सिंह ने बाकायदा प्रेसवार्ता आयोजित कर इस पूरे प्रकरण पर खुलकर बोलते हुए कहा पिछले दिनों रामदुलारी नामक महिला द्वारा उनके विधायक पति पर लगाये गए सभी आरोप पूरी तरह से आधारहीन और तथ्यहीन है क्यों कि डा. ओपी चैधरी एजुकेशन ट्रस्ट की स्थापना 2010 में की गई थी जिसमें तीन ट्रस्टी थें स्वयं उनके पिता डा. ओपी चैधरी, दूसरे अनुराग सिंह और स्वयं वह हैं। ऐसे में डा. सरिता चैधरी, सुधा कटियार और श्रीमती राम दुलारी जो कभी इस ट्रस्ट की सदस्य थी ही नहीं द्वारा कुछ भी बोलना न केवल गलत है बल्कि हास्यपद भी है। उन्होंने बताया कि उनके पिता डा. ओपी चैधरी एक मेडिकल कालेज की स्थापना करना चाहते थे इसके लिए उन्होंने डा. ओपी चैधरी एजुकेशन ट्रस्ट के माध्यम से राजधानी के कनकहा गांव रायबरेली रोड मोहनलालगंज के पास कुछ भूमि क्रय किया तथा 2010 में ही क्रय की गई भूमि पर उनके द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ कराया गया था। इसी बीच 27 जनवरी 2011 को उनका निधन हो गया। जिनके निधन के पश्चात ट्रस्ट में दो सदस्य रह गए मै और मेरे पति अनुराग सिंह उन्होंने आगे बताया कि मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए आयकर विभाग द्वारा ओपी चैधरी ट्रस्ट के सम्बन्ध में कुछ आपत्तियां की गई तथा 12 एए प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। ऐसी दशा में स्वर्गीय ओपी चैधरी मेमोरियल ट्रस्ट में विक्रय किया गया जो तकरीबन 23 एकड़ में है न कि 40 एकड़ में है। यहां यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि दोनों ही ट्रस्टों में डा. स्नेहलता सिंह सचिव है तथा क्रय विक्रय का अधिकार सिर्फ सचिव को है। ऐसे में यह आरोप लगाना के के्रता और विक्रेता दोनों एक ही व्यक्ति है असत्य और निराधार है। सभी विक्रय विलेख नियमानुसार निष्पादित किए गए है। विधायक पत्नी स्नेहलता ने कहा इन आरोपों से संबंधित कई वाद सिविल और आपराधिक रामदुलारी आदि द्वारा न्यायालय में दायर किये गए है जो अभी भी लम्बित है। न्यायालय के समक्ष लम्बित वादों के सम्बन्ध में रामदुलारी आदि ने कोई जिक्र ही नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि रामदुलारी व उनकी पुत्रियों ने 2013 में एक अन्य सिविल वाद दायर किया था जिसमें प्रार्थना की गई थी कि रामदुलारी को स्व. ओपी चैधरी के स्थान पर मुख्य ट्रस्टी घोषित किया जाय, परन्तु मा. न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में यह व्यवस्था दी कि अग्रिम तिथि तक विक्रित भूमि में नामान्तरण पर यथा स्थिति बनी रहेगी, परन्तु निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लगाई। ऐसे में रामदुलारी आदि ने नामान्तरण पर यथा स्थिति को भ्रामक व गलत तरीके से पेश किया कि यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश है तथा नामान्तरण पर भी रोक है। जबकि सिर्फ नामान्तरण पर ही यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश है तथा निर्माण कार्य पर न्यायालय द्वारा कोई रोक नहीं लगाया गया है। प्रेसवार्ता के दौरान स्नेहलता ने बताया कि विरोधियों द्वारा यह कहना कि ओपी चैधरी मेमोरियल ट्रस्ट के पास कोई जमीन नहीं है नितांत असत्य व निराधार है। उपरोक्त ट्रस्ट की भूमि पर ही निर्माण कार्य हुआ है तथा आयुर्वेदिक कालेज मान्यता के लिए नियमानुसार कार्यवाही की गई है। संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत जांच कर संस्था के पक्ष में कालेज खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यहां यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि तथाकथित अवमानना वाद की कोई नोटिस न्यायालय से प्राप्त नहीं हुई। बावजूद इसके सिविल कोर्ट से कोई अपेक्षित आदेश न प्राप्त होने पर रामदुलारी की पुत्री सरिता चैधरी ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिट याचिका संख्या 27459 इस आशय का प्रस्तुत किया कि विपक्षीगण को निर्माण कार्य से रोक दिया जाए तथा भारत सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज की मान्यता न दें, परन्तु उच्च न्यायालय ने भी उनके पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं किया। जहां तक आपराधिक वाद संख्या 1896/2011 का प्रश्न है वह भी आधारहीन तथ्यों पर आधारित है। जिसमें उन्होंने न्यायालय का सम्मान करते हुये जमानत प्राप्त किया। चंूकि परिवाद झूठे तथ्यों पर आधारित है इसलिये न्यायालय के समक्ष परिवाद को समाप्त करने हेतु डिस्चार्ज प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया जो विचाराधीन है। मजे कि बात है कि सभी न्यायालयों से निराशा हाथ लगने के उपरान्त राम दुलारी उनकी दोनों पुत्रियों सुधा कटियार व डा. सरिता चैधरी एवं दामाद डा. विवेक सिंह द्वारा प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया को गलत तथ्य प्रस्तुत करके गुमराह करने की कोशिश की गयी ताकि अनुराग सिंह व उनके परिवार की छवि को धूमिल किया जा सके। ऐसी अनेक आधारहीन शिकायतें रामदुलारी आदि द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार समक्ष पूर्व में भी की जा चुकी है जिसकी जांच में सारे आरोप असत्य पाये गये। गौरतलब हो कि जिस समय अनुराग सिंह को भारतीय जनता पार्टी द्वारा चुनार विधान सभा क्षेत्र का प्रत्याशी घोषित किया गया था उस समय भी राम दुलारी के दामाद विवेक सिंह द्वारा एक पत्रकार की मदद से प्रिंट मीडिया व सोशल मीडिया पर असत्य व भा्रमक प्रचार शुरू किया गया था। वह दुष्प्रचार तभी थमा जब अनुराग सिंह ने उक्त पत्रकार व विवेक सिंह के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया, जो न्यायालय में विचााराधीन है। डा. स्नेहलता ने कुछ दिन पूर्व विजिलेंस विभाग द्वारा पीजीआई थाने में अनुराग सिंह के विरूद्ध फर्जीवाड़े सम्बन्धी सूचना रिपोर्ट पंजीकृत कराये जाने को निराधार बताते हुए कहा कि उसकी विवेचना प्रचिलित है, वैसे यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि 2008 से 2010 में समाज कल्याण द्वारा छात्रवृत्ति निर्गत की गयी है उस समय स्व. ओ.पी. चैधरी संस्था के अध्यक्ष थे तथा अभिलेखों के निरीक्षण से यह स्पष्ट है कि संस्था द्वारा कोई धोखाधड़ी नहीं की गयी है तथा विजिलेंस द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है। ऐसे में सभी आरोप स्वतः ही बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया पर उन्हीं असत्य तथ्यों का सहारा लेकर आधारहीन व भ्रामक दुष्प्रचार करके तथा प्रेस कान्फ्रेंस करके उनके विधायक पति अनुराग सिंह एवं उनके परिवार व उनकी राजनैतिक छवि को नुकसान पहंुचाने का कुचक्र किया जा रहा है। जो मामले न्यायालय में लम्बित है और उनमें राम दुलारी आदि के पक्ष में कोई आदेश नहीं पारित हुआ तथा उनका उद्देश्य सिर्फ अनुराग सिंह व उनके परिवार व उनकी संस्था की छवि खराब करना ही है जो निरूद्देश्य प्रार्थना-पत्रों के सहारे ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा रहा है जो उनके परिवार की छवि खराब करने की नियत को साफ-साफ दर्शाता है। इस प्रकार के प्रेस कान्फ्रेंस द्वारा तथ्यहीन भा्रमक प्रचार का काई औचित्य नहीं बनता है।
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