Mumbai | Hindustan ki Aawaz | Mohammed Mukim Shaikh
मुंबई, 2 सितंबर 2026: गणेशोत्सव के दौरान विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परीक्षा का अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसे लेकर BMC स्कूलों के परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव की मांग उठी है। वार्ड क्रमांक 90, वाकोला-कलीना की नगरसेविका, स्थायी समिति सदस्य और मुंबई महिला कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट तुलिप ब्रायन मिरांडा ने BMC शिक्षा समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर गणेशोत्सव की अवधि में परीक्षाएं और महत्वपूर्ण शैक्षणिक मूल्यांकन नहीं कराने की मांग की है।
मिरांडा ने अपने पत्र में कहा कि गणेशोत्सव मुंबई और महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक पर्व है। उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने परिवारों के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में इसी अवधि में परीक्षा या यूनिट टेस्ट आयोजित होने से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक और मानसिक दबाव पड़ सकता है।
परिवार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मिले समय
एडवोकेट मिरांडा के मुताबिक, गणेशोत्सव विद्यार्थियों के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि उन्हें परिवार और सामाजिक परिवेश से जुड़ने का अवसर भी देता है। इसलिए विद्यार्थियों को उत्सव में सहभागी होने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
उन्होंने BMC के अधिकार क्षेत्र में आने वाले स्कूलों के लिए गणेशोत्सव के दौरान परीक्षा, घटक चाचणी (यूनिट टेस्ट) अथवा अन्य महत्वपूर्ण मूल्यांकन नहीं कराने के निर्देश जारी करने की मांग की है।
अक्टूबर में परीक्षा कराने का सुझाव
मिरांडा ने शिक्षा समिति के समक्ष यह विकल्प भी रखा है कि यदि परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव से शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित होने की आशंका हो, तो परीक्षाएं गणेशोत्सव समाप्त होने के बाद अक्टूबर महीने में आयोजित की जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुविधा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि उत्सव के दौरान बच्चों को पढ़ाई और परीक्षा के अतिरिक्त दबाव का सामना न करना पड़े।
एडवोकेट तुलिप ब्रायन मिरांडा ने BMC शिक्षा विभाग से मामले पर सकारात्मक विचार करते हुए महानगरपालिका स्कूलों को आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने की मांग की है।
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