आधुनिक स्कूल, सशक्त शिक्षक और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मोहम्मद मुकीम शेख | मुंबई
मुंबई, 23 अगस्त 2026: महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने के लिए राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग को अब ‘मिशन मोड’ में काम करने के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को मुंबई स्थित नंदनवन बंगले पर स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब चार घंटे तक बैठक कर राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं, पहलों और अब तक हुई प्रगति की जानकारी उपमुख्यमंत्री को दी। विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए शिंदे ने कहा कि इन योजनाओं और पहलों का लाभ महाराष्ट्र के प्रत्येक स्कूल और प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने राज्य के स्कूलों के आधुनिकीकरण तथा शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक, दृश्यमान और गुणवत्तापूर्ण बदलाव के लिए स्पष्ट, व्यापक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बदलती आकांक्षाओं के अनुरूप बदलें स्कूल
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि आज के बच्चों की आकांक्षाएं और सपने बदल रहे हैं। इसलिए स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को भी समय के साथ बदलना जरूरी है। महाराष्ट्र के प्रत्येक बच्चे को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने वाली आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य के अनुकूल शिक्षा व्यवस्था विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कार्ययोजना में शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और अनुभवी शिक्षकों को शामिल करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और क्षमता-विकास कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा उत्कृष्ट एवं नवोन्मेषी कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित और सम्मानित करने पर जोर दिया।
हर विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास प्राथमिकता
शिंदे ने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, मध्यान्ह भोजन योजना की समीक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
केंद्र की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन
उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा योजनाओं का महाराष्ट्र में प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ राज्य के स्कूलों और विद्यार्थियों तक पहुंच सके।
अभिभावक और समाज भी बनेंगे शिक्षा के भागीदार
शिंदे ने स्कूलों के विकास में माता-पिता, पूर्व विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की सफल पहलों और अच्छे कार्यों की जानकारी जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जानी चाहिए, ताकि स्कूलों में हो रहे सकारात्मक बदलावों से विद्यार्थी, अभिभावक और समाज अवगत हो सकें।
सांसद-विधायकों को स्कूल गोद लेने के लिए प्रोत्साहन
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सांसदों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों को गोद लेकर उनके विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उपलब्ध निधि और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्कूलों के विकास को गति देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सरकारी स्कूलों के विकास को नई गति मिल सकती है।
कॉर्पोरेट क्षेत्र की विशेषज्ञता का होगा उपयोग
सरकारी स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए कॉर्पोरेट और औद्योगिक क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए। शिंदे ने बताया कि आने वाले सप्ताहों में वे कॉर्पोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के प्रमुखों के साथ बैठकें करेंगे। इन बैठकों के माध्यम से सरकारी स्कूलों के लिए तकनीक, प्रशिक्षण, पेशेवर विशेषज्ञता, संसाधन और अन्य आवश्यक सहयोग जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
हर सप्ताह होगी प्रगति की समीक्षा
शिक्षा विभाग की कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर सप्ताह प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में योजनाओं की प्रगति, सामने आ रही बाधाओं और कार्य में तेजी लाने के लिए आवश्यक निर्णयों की समीक्षा की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि स्कूलों में बदलाव से विद्यार्थियों का भविष्य बदलेगा और विद्यार्थियों का भविष्य बदलने से महाराष्ट्र का भविष्य बदलेगा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रत्येक अच्छे प्रयास को मिशन मोड में आगे बढ़ाने और उसका लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
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