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रिपोर्टर: मोहम्मद मुकीम शेख | मुंबई | 

18 जुलाई 2026 मुंबई: विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने पर मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने राज्य सरकार से शिक्षकों को इस कार्य से मुक्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद शिक्षकों पर पहले ही अध्ययन-अध्यापन का कार्यभार बढ़ चुका है। ऐसे में चुनावी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

भवानजी ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से आग्रह किया है कि SIR अभियान के लिए शिक्षकों के स्थान पर अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियों, शिक्षित बेरोजगार युवाओं, महाविद्यालय के विद्यार्थियों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) की सेवाएं ली जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्य में लगाए जाने वाले लोगों को उचित मानधन भी दिया जाए।

उन्होंने हाल ही में घाटकोपर की एक शिक्षिका द्वारा चुनाव संबंधी कार्य के अत्यधिक तनाव के कारण कथित रूप से आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे गंभीर और चिंताजनक बताया। उनके अनुसार इस प्रकार की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

भवानजी ने कहा कि शिक्षक समाज हमेशा से चुनावी ड्यूटी, जनगणना तथा अन्य सरकारी कार्यों का पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करता रहा है। इसके बावजूद वर्तमान समय में अनेक शिक्षक पहले से ही बीएलओ (BLO) की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में SIR अभियान की अतिरिक्त ड्यूटी दिए जाने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई बाधित हो रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए SIR अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें सभी नागरिकों का सहयोग आवश्यक है। हालांकि उनका मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। यदि उन पर लगातार अतिरिक्त चुनावी कार्य का बोझ डाला जाएगा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा।

भवानजी ने राज्य सरकार से मांग की कि SIR अभियान के संचालन के लिए वैकल्पिक मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षकों को शिक्षण कार्य से हटाकर अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां न दी जाएं और विद्यार्थियों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके।

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