मोहम्मद मुकीम शेख | मुंबई
मुंबई : मुंबई के पूर्व उपमहापौर एवं शिवसेना के वरिष्ठ नेता बाबूभाई भवानजी ने देश के समग्र विकास के लिए सकारात्मक सोच, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सामूहिक संकल्प, परिश्रम और सकारात्मक योगदान से संभव है।
एक प्रेस विज्ञप्ति में भवानजी ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सनातन संस्कृति, ज्ञान, परंपरा, संघर्ष और सामर्थ्य का प्रतीक है। अनेक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के बाद आज भारत नए आत्मविश्वास के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। ऐसे समय में देश को विकास-केंद्रित और सकारात्मक सोच की सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सूचना युग में विचार अत्यंत तेजी से समाज तक पहुँचते हैं। सकारात्मक और रचनात्मक विचार समाज को प्रेरित करते हैं, जबकि अफवाहें, अधूरी जानकारी, घृणा फैलाने वाली भाषा और निरंतर नकारात्मकता सामाजिक विश्वास तथा एकता को कमजोर करती है। उन्होंने इन प्रवृत्तियों को समाज के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता विकास की गति में बाधा उत्पन्न करती है।
भवानजी ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा प्रयुक्त "झुरल जैसे नकारात्मक विचार" का आशय किसी व्यक्ति, संगठन या समुदाय से नहीं, बल्कि उन नकारात्मक प्रवृत्तियों से है जो भ्रम, अविश्वास और संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका विरोध तथ्यों, जनहित और राष्ट्रहित पर आधारित तथा रचनात्मक होना चाहिए। केवल आलोचना नहीं, बल्कि व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करना भी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि आज देश के सामने युवाओं के लिए रोजगार, किसानों की समृद्धि, उद्योगों को प्रोत्साहन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और वैश्विक स्तर पर भारत की सशक्त पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषय हैं। राजनीति का केंद्र इन जनहित के मुद्दों पर होना चाहिए, ताकि देश विकास की दिशा में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ सके।
भवानजी ने कहा कि जब राजनीति केवल आरोप-प्रत्यारोप, कटु भाषा और निरंतर टकराव तक सीमित हो जाती है, तब जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने समाज से सकारात्मक संवाद, विश्वास और समाधान-आधारित नेतृत्व को प्रोत्साहित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मतभेद लोकतंत्र की सुंदरता हैं, लेकिन मनभेद उसकी कमजोरी बन सकते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अफवाहों के बजाय सत्य, घृणा के बजाय एकता और नकारात्मकता के बजाय विकास के मार्ग को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
अपने संदेश के अंत में बाबूभाई भवानजी ने कहा कि भारत का भविष्य केवल राजनीतिक नारों या विरोध से नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास, परिश्रम और सकारात्मक सोच से निर्मित होगा। उन्होंने कहा कि कोई भी विजय किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि वह भारत माता, देश की जनता और उज्ज्वल भविष्य की विजय होती है। साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों से मातृभूमि के साथ मजबूती से खड़े होकर छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वप्न "हिंदवी स्वराज्य" को साकार करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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