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मोहम्मद मुकीम शेख | ठाणे

ठाणे, 13 जुलाई। शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद में उद्धव ठाकरे गुट (उबाठा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह हिंदुत्व के मुद्दों से दूर होकर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर पर सवाल उठाने वाले नेताओं को पहले वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

म्हस्के ने कहा कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना-भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लिए हिंदुत्व और बालासाहेब ठाकरे के विचारों से समझौता किया। उनका आरोप था कि वोट बैंक की राजनीति के चलते उद्धव ठाकरे गुट लगातार हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर अलग रुख अपनाता रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे गुट ने कभी आवाज नहीं उठाई। साथ ही उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे वक्फ बोर्ड को भंग करने के पक्षधर थे, जबकि उद्धव ठाकरे गुट ने वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड द्वारा विभिन्न भूमि पर किए गए कथित दावों के मुद्दे पर भी उद्धव ठाकरे गुट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

सांसद म्हस्के ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए भी उद्धव ठाकरे गुट की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के कारण पार्टी ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर राष्ट्रहित का समर्थन नहीं किया।

राम मंदिर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ। उनके अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है और इस पर टिप्पणी करने से पहले वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं पर भी समान रूप से सवाल उठाए जाने चाहिए।

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार पर भी निशाना साधते हुए नरेश म्हस्के ने कहा कि केवल नाम कन्हैया होने से कोई भगवान श्रीकृष्ण नहीं बन जाता। उन्होंने कन्हैया कुमार की राजनीतिक क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें पहले अपनी राजनीतिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

पेपर लीक मामले पर भी साधा निशाना

नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को उद्धव ठाकरे गुट द्वारा दिए गए समर्थन पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद म्हस्के ने कहा कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में महाराष्ट्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET), म्हाडा भर्ती तथा स्वास्थ्य विभाग की भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया।

(नोट: इस समाचार में व्यक्त सभी आरोप एवं बयान शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के द्वारा पत्रकार परिषद में दिए गए हैं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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