मुंबई। मुंबई को डिजिटल और तकनीक आधारित स्मार्ट प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ाते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने भारत की पहली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित बिल्डिंग परमिशन प्रणाली ‘CivitTwin’ शुरू कर दी है। इस अत्याधुनिक प्रणाली का लोकार्पण गुरुवार (29 मई 2026) को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘मुंबई टेक वीक 2026’ कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के हस्ते किया गया।
इस अवसर पर मुंबई की महापौर Ritu Tawde तथा बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त Ashwini Bhide सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बीएमसी द्वारा इससे पहले ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) के लिए भारत की पहली ई-टीडीआर प्रणाली शुरू की गई थी। अब ‘CivitTwin’ के माध्यम से महानगरपालिका ने डिजिटल मुंबई की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। यह प्रणाली “डिजिटल अप्रूवल ट्विन” की संकल्पना पर आधारित है, जिसका उद्देश्य मुंबई में भवन अनुमति प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी, सटीक और अधिक प्रभावी बनाना है।
महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने कंप्यूटर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से इस प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि ‘CivitTwin’ भवन प्रस्तावों की आधिकारिक प्रस्तुति से पहले ही उनकी “वर्चुअल प्री-स्क्रूटनी” करेगी। इसके जरिए वास्तुकारों, डेवलपर्स और लाइसेंसधारी सर्वेक्षकों को प्रस्तावों में मौजूद त्रुटियां, अधूरे दस्तावेज, नियम उल्लंघन या आवश्यक एनओसी की जानकारी प्रारंभिक स्तर पर ही मिल जाएगी। इससे मंजूरी प्रक्रिया में होने वाली देरी में बड़ी कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भवन प्रस्ताव जमा होने के बाद अक्सर आपत्तियों के साथ वापस भेजे जाते हैं, जिसके कारण कई बार हफ्तों और महीनों तक प्रक्रिया लंबित रहती है। नई एआई आधारित प्रणाली इन समस्याओं का प्रभावी समाधान साबित होगी।
कैसे काम करेगी ‘CivitTwin’ प्रणाली
नई प्रणाली में वास्तुविशारद या डेवलपर जैसे ही भवन के नक्शे और संबंधित दस्तावेज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करेंगे, एआई आधारित प्रणाली स्वतः उनकी वर्चुअल जांच करेगी। यह प्रणाली विकास नियंत्रण नियमों (DCR) के अनुसार अनुपालन की जांच करेगी, आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और आवश्यक एनओसी की पहचान करेगी।
अब तक विभिन्न आवेदन, महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन एवं नगररचना अधिनियम से संबंधित चेकलिस्ट तथा तकनीकी जानकारी डेवलपर्स और वास्तुविशारदों को स्वयं भरनी पड़ती थी, जिसमें समय और श्रम अधिक लगता था। अब यह प्रक्रिया एआई के माध्यम से स्वचालित रूप से पूरी होगी तथा आवश्यक जानकारी सीधे ड्रॉइंग और नक्शों से ली जाएगी।
बीएमसी के अनुसार, इस प्रणाली से भवन प्रस्तावों की गुणवत्ता बेहतर होगी, प्रशासनिक लंबित मामलों में कमी आएगी और अधिकारियों को जटिल नीतिगत विषयों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
मुंबईकरों को होगा सीधा लाभ
नई डिजिटल प्रणाली का सीधा लाभ आम मुंबईकरों को भी मिलेगा। भवन अनुमति प्रक्रिया तेज होने से हाउसिंग और पुनर्विकास परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। इससे घर खरीदारों की प्रतीक्षा अवधि कम होगी और परियोजनाओं में अनिश्चितता घटेगी।
वास्तुविशारदों और डेवलपर्स के लिए भी यह प्रणाली महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि अब उन्हें बार-बार प्रस्तावों में सुधार कर पुनः प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम पड़ेगी। इससे समय, श्रम और खर्च में बड़ी बचत होगी।
नागरीय नियोजन को मिलेगी मजबूती
बीएमसी के अनुसार, ‘CivitTwin’ केवल भवन अनुमति प्रणाली तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में शहरी नियोजन को भी अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाने में मदद करेगी। एआई आधारित डेटा विश्लेषण के माध्यम से सड़कें, जलापूर्ति, सीवरेज, यातायात प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं की बेहतर योजना तैयार की जा सकेगी।
महानगरपालिका ने बताया कि वर्ष 2015 से मुंबई में बिल्डिंग परमिशन प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्ष 2018 में विभिन्न विभागों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया, जबकि 2020 में टीडीआर प्रक्रिया ऑनलाइन की गई। अब 2026 में ई-टीडीआर और ‘CivitTwin’ प्रणाली के माध्यम से स्मार्ट और पारदर्शी शहरी प्रशासन के नए युग की शुरुआत हुई है।
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