मुंबई महानगर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 547 पोर्टेबल डिवॉटरिंग पंपों पर आधुनिक ‘आईओटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम’ लागू किया है। इस नई तकनीक के जरिए पंपों की कार्यप्रणाली पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सकेगी। महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) तकनीक के उपयोग से डिवॉटरिंग पंपों का संचालन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तेज होगा।
महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने गुरुवार (29 मई 2026) को आपत्कालीन व्यवस्थापन विभाग में विकसित किए गए “डिवॉटरिंग पंप मॉनिटरिंग सिस्टम डैशबोर्ड” का निरीक्षण किया। इस अवसर पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत बांगर, उप आयुक्त प्रशांत गायकवाड, प्रमुख अधिकारी रश्मी लोखंडे तथा कार्यकारी अभियंता वनिता कोकाटे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
बीएमसी के अनुसार, मुंबई के निचले इलाकों में भारी बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए शहर क्षेत्र में 146, पूर्व उपनगरों में 178 तथा पश्चिम उपनगरों में 223 डिवॉटरिंग पंप तैनात किए गए हैं। इन पंपों के माध्यम से सड़कों और निचले क्षेत्रों में जमा पानी को तेजी से नालों, जलवाहिनियों और समुद्र की ओर मोड़ा जाता है।
नई आईओटी प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक डिवॉटरिंग पंप पर विशेष इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरण लगाए गए हैं। इसके जरिए पंप की स्थिति, चालू या बंद होने का समय, कार्य अवधि, पंप की क्षमता और तकनीकी जानकारी की स्वचालित डिजिटल रिकॉर्डिंग की जाएगी। यह पूरी जानकारी केंद्रीय डैशबोर्ड पर रियल टाइम उपलब्ध रहेगी, जिससे अधिकारियों को तुरंत स्थिति की समीक्षा करने और आपातकालीन निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने बताया कि इस प्रणाली से पंप वास्तव में कितनी देर तक चालू रहा, कितने समय तक पानी निकाला गया तथा मशीनरी का सही उपयोग हुआ या नहीं, इसकी सटीक डिजिटल जानकारी उपलब्ध होगी। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि डिवॉटरिंग पंपों के संचालन के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। सभी पंप ऑपरेटरों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से संबंधित स्थानों की तस्वीरें नियंत्रण कक्ष तक तुरंत भेजी जा सकेंगी। इसके अलावा प्रत्येक ऑपरेटर के मोबाइल फोन पर जियो-फेंसिंग तकनीक लागू की गई है, जिससे कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यस्थल की निगरानी की जा सकेगी।
बीएमसी के अनुसार, कुछ स्थानों पर लगाए गए सेंसरों की मदद से जलस्तर बढ़ने पर तुरंत अलर्ट प्राप्त होगा और आवश्यकतानुसार संबंधित पंप सक्रिय किए जाएंगे। इस प्रणाली से पंपों के रखरखाव और मरम्मत की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी। यदि किसी पंप में खराबी की संभावना दिखाई देती है तो तकनीकी टीम को पहले ही सूचना मिल जाएगी, जिससे समय रहते मरम्मत कर पंप को कार्यरत रखा जा सकेगा।
आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि यह प्रणाली मानसून के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में बेहद उपयोगी साबित होगी। इससे वरिष्ठ अधिकारियों और नियंत्रण कक्ष को शहरभर में सक्रिय पंपों की स्थिति का एक साथ आकलन करने में आसानी होगी और जलभराव वाले क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान में मुख्य नियंत्रण कक्ष में उपलब्ध इस डैशबोर्ड को सभी प्रशासनिक विभागों के नियंत्रण कक्षों से भी जोड़ा जाए, ताकि प्रत्येक विभाग अपने क्षेत्र के पंपों की स्थिति रियल टाइम में देख सके। साथ ही संबंधित अभियंताओं के संपर्क नंबर भी डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराए जाएं।
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