राम सेवक कठेरिया को प्रतीक चिन्ह भेंट करते मुख्य अतिथि
-हिन्दू मुस्लिम भाईचारा कमेटी के तत्वाधान में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कन्नौज,हिन्दुस्तान की आवाज़,अनुराग चौहानकन्नौज। हिन्दू मुस्लिम भाईचारा कमेटी के तत्वाधान में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य व वरिष्ठ साहित्यकार तारिक शाहीन को शाल ओढाकर सम्मानित किया गया।
सरायमीरा स्थित विनायक एजूकेशन सेन्टर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए दो दर्जन कवियों व शायरों ने अपनी रचनाआंे के माध्यम से विभिन्न सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि ने कार्यक्रम में शामिल हुए शायरों व कवियों को प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में कन्नौज का सराहनीय योगदान है। इस मौके पर रामसेवक कठेरिया सेवक अदीबी ने कहा कि दिल में हो खाक सारी तो हर मुद्दुआ मिले जो चूर हो खुद ही में उसे क्या खुदा मिले। मुफीद कनौजी ने कहा कि बन के शोला मैं हजारों को जला देता मगर राख आखिर मुझको भी होना था जल जाने के बाद। मुख्य अतिथि तारिक शाहीन इंदौरी ने कहा कि कोई पत्थर न था सलीके का आइना किसके रूबरू करते। फजील अल्बी ने कहा कि डालते हैं कमन्द जुगनू पर शोर करते हैं आसमान तलक। अनिल द्विवेदी मनीषी ने कहा कि बिन बादल बरसात हो रही नूतन किसलय मुरझाए हैं हरियाली औंधे मुंह पसरी कण्टक वन फिर बौराए हैं। सुलभ अग्निहोत्री ने कहा कि जल तरंग बन गया बदन समीर का बूंद ने थमा दिये दो पात्र प्यार के। मशरूर सौंसरापुरी ने कहा कि सेहरा को गुलजार बनाकर छोडेंगे नफरत को भी प्यार बनाके छोडेंगे। डा. सैफ ने कहा कि अगर हिन्दू मुसलमां दिल से नफरत को फना कर दें फिर चैनो अमन में हिन्दुस्तान हो जाए। बालकवि अनिल द्विवेदी तपन ने कहा कि काले बदरा पानी खोल सारी दुनियां डावांडोल पानी ही अनमोल रतन है जीवन में मधुरस को घोल। मश्कूर कनौजी ने कहा कि अपने दिल से हूं मजबूर क्या करूं तुमने भुला दिया तुम्हें भूला नहीं हूं मैं। खबीर कनौजी ने कहा कि तंग राहांे से जब गुजर होगा सिर्फ साया ही हम सफर होगा। लुब्ना गजल ने कहा कि इस तरह मेरे दिल को दूरियां सताती हैं जिस तरह फूलों को तितलियां सताती हैं। विकास कुशवाहा ने कहा कि यूं तो मेरी गली में आज भी है पनघट आधुनिक युग के हैडपम्प के रूप में। डा. मुस्लिम कुरैशी ने कहा कि ये हुस्न तेरा हुस्ने नजर है तो मुझे क्या शैंदा तेरी सूरत पे बरार है तो मुझे क्या। इस दौरान अरविन्द बाजपेई, कुमार विवेक, डा. अमरनाथ दुबे, अभिनव मिश्रा, महेश शर्मा मुख्तार कनौजी, आदित्य ने भी अपनी रचनाएं पढीं। इस मौके पर राना कठेरिया, जैकी कठेरिया, राज कठेरिया, जितेन्द्र, गौरव, बार्बी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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