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गोडरामपुर के आदिवासियों की समस्याओं को मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में लेते ही, प्रशासन हरकत में आया, आवास विहीन आदिवासियों को मिलेंगे आवास के पट्टे 

बांदा, हिन्दुस्तान की आवाज,सन्तोष कुशवाहा

बांदा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा बांदा जिले के फतेहगंज थाना क्षेत्र के गोबरी, गोडरामपुर के जंगल में आवाद आदिवासियों की समस्याओं का संज्ञान लेने पर राज्य सरकार के प्रमुख सचिव नें जिलाधिकारी बांदा से जानकारी तलब किया। डीएम के आदेश पर गांव पहुंचे नायब तहसीलदार अतर्रा नें आदिवासी महिलाओं के बयान दर्ज कर प्रधान और लेखपाल से आवास के पट्टों की पत्रावली तैयार करके आवास के पट्टा करने का निर्देश दिया।  मालूम हो कि ग्राम गोबरी, गोडरामपुर आंश ड़ढ़वामानुपर, विकास खण्ड़ नरैनी, थाना फतेहगंज, जिला बांदा के जंगल में आवाद आदिवासी गोंड़, मवइया, खैरगर जाति के लोगों नें एक साल पहले दिल्ली से आये कुछ पत्रकारों को आपनी भूंख और गरीबी की दर्द भरी दास्तान सुनाई थी। मीड़िया की सुखिर्यों में नमक काढेला और रोटी खाते आदिवासियों रोजी-रोटी की विकराल समस्या को संज्ञान में ले कर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली नें उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव से यहां आदिवासियों की समस्याओं का ब्योरा तलब किया और उनके समाधान के लिए सरकारी योजनाओं से जोड़नें और लाभान्वित न कराने के कारणों की तफसीस प्रारम्भ किया।
प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश सरकार के जिलाधिकारी बांदा से फतेहगंज के जंगल में आवाद आदिवासियों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट मांगने पर जिलाधिकारी बांदा नें पंचायत विभाग द्वारा संचालित विकास योजनाओं आवास कालोनी, शौंचालय, महात्मागांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत जाब कार्ड, रासन कार्ड, इनके खाने पीने और ब्यवसाय की जानकारी हासिल करनें के लिए 5 अगस्त 2017 को नायब तहसीलदार दिलीप कुमार और राजस्व निरीक्षक रामविसाल कुशवाहा, हल्का लेखपाल शिवचरन यादव, रोजगार सेवक सियादुलारी वर्मा, प्रधान सारिका गुप्ता और उनके पिता ओमप्रकाश गुप्ता, थानाध्यक्ष फतेहगंज पंकज तिवारी पुलिस बल के साथ गोबरी-गोडरामपुर के जंगल में आवाद आदिवासियों के रहन सहन, खान-पान, रोजगार और उनकी समस्याओं की स्थलीय समीक्षा करायी।

जांच दल नें गोडरामपुर के आदिवासियों ने बताया कि जाबकार्ड हैं मगर उन पर रोजगार नहीं मिलता, बेरोजगारी और गरीबी के कारण गांव के पुरुषों को दूसरी जगह मजूरी के लिए पलायन होना पड़ता है। आवास की जगह नहीं है, किसी को प्रधानमंत्री आवास और इन्दिरा आवास, लाहिया आवास का लाभ भी नहीं मिला है। जंगल में उगने वाली वन करैली, पड़वारा की सब्जी कभी कभार मिलती है, महीने में 20 दिन नमक रोटी ही खा कर गुजारा करते है।

नायब तहसीलदार अतर्रा दिलीप कुमार नें सारिका गुप्ता प्रधान और शिवचरन लेखपाल डढवामानपुर को निर्देश दिया कि श्रीमती प्रभा पत्नी दिनेश, श्रीमती चून्नी पत्नी रामविश्वास, श्रीमती गीता पत्नी बेटू, श्रीमती रामकली पत्नी फूल सिंह, श्रीमती प्रेम रानी पत्नी पप्पू, श्रीमती रानी पत्नी श्रीपाल, श्रीमती प्यारी पत्नी बारे लाल, श्रीमती प्रभा पत्नी दुर्गा, श्रीमती संगीता पत्नी शिवनरायन, इन्द्रपाल, सन्तू पुत्र बलबीर आदि आवास विहीन आदिवासी महिलाओं और पुरुषों के नाम रोड़ के किनारे की भूमि पर आवासीय भूमि आबंटन की पत्रावली तैयार करके भूूमि प्रबंधक समिति से प्रस्ताव पास कराने की कार्यवाही करावें। सीघ्र ही सभी को आवास के पट्टा दिये जायेगें।
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