राष्ट्रभक्ति की भावना दिलाएगी सूखे से मुक्ति
लातूर, 25 मई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आज यहां कहा कि राज्य को अगर सूखे और जल संकट से पूरी तरह उबारना है तो राज्य के सिंचाई और पानी के स्रोतों का विकास करना ही होगा। यह समय की मांग भी है, एक बार राज्य में जल स्रोतों का अच्छी तरह से विकास कर लिया गया तो राज्य में फिर कभी भी सूखा नहीं पड़ेगा।
जलयुक्त शिवार योजना का जयजा लेने राज्य के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री श्री फड़नवीस ने लातूर के निलंगा तहसील के हलगरा गांव में किसानों से बातचीत करते हुए राज्य में मौजूद जलस्रोतों के विकास पर जोर दिया। यहां श्रमदान के बाद शिवार संवाद का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर लातूर के पालक मंत्री संभाजी पाटील-निलंगेकर, लोकसभा सदस्र सुनील गायकवाड, जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माणिक गुरसल,पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवाजीराव राठोड़ समेत बड़ संख्या में अधिकारी और किसान मैजूद थे।
हलगरा गांव के निवासियों द्वारा आपसी सहयोग से किये गए जलयुक्त शिवार कार्य की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विविध योजनाओं का लाभ लेकर जिस तरह रालेगण सिद्धि स्वावलंबी बना, उसी तरह हलगरा गांव को भी स्वावलंबी बनना चाहिए। श्री फड़नवीस ने कहा,"सिनेमा में नायक कुछ ही मिनटों में गांव का कायापलट कर देता है, पर वह काल्पनिक होता है. परंतु यहां आप लोगों ने मिलकर जलयुक्त शिवार योजना पर काम किया है तो मेरी नजर में असली हीरो आप सब हैं। गांववासियों के यह कार्य देखकर मैंने हलगरा गांव को दत्तक लिया है और इस गांव को सारी योजनाओं का लाभ दिलवाऊंगा।"
पानी के महत्व के बारे में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां जल वहीं जीवन हैं। पानी समाप्त यानी जीवन की भी समाप्ति। छत्रपति शिवाजी महाराजा ने भी पानी का महत्व समझा था तभी उनके समय में हर किले में पानी की योग्य व्यवस्था की थी। श्री फड़नवीस ने कहा, "भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जब देश के सिंचाई मंत्री थे तब के बड़े बांधों का निर्माण उन्होंने करवाया था। इन बांधों का निर्माण करते समय ही उन्होंने जल संरक्षण के कार्य को भी महत्व दिया था। इसका यह अर्थ हुआ कि हमें भी पानी की हर बूंद का महत्व पता होना चाहिए। गांव वालों को ये संकल्प लेना चाहिए कि वो पानी का एक एक बूंद गांव की ज़मीन में ही सुरक्षित रखकर पानी के मामले में गांव को स्वावलंबी बनाएंगे।"
श्री फड़नवीस ने कहा कि जल स्वतंत्रता की लड़ाई में सभी लोगों को एकत्र होना होगा। देश की बड़े बांधों में से 40 प्रतिशत बांध राज्य में हैं। इसके बावजूद यहां 80 प्रतिशत फसल होती है। यहां सूखे की समस्या प्राकृतिक ना होकर मानव द्वारा निर्मित है। इसलिए जलयुक्त शिवार पर बड़े पैमाने पर काम होना अत्यंत आवश्यक है। जलयुक्त शिवार योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससो पहले जल संरक्षण की अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं। इसलिए 14 योजनाओं को मिलाकर जलयुक्त शिवार योजना शुरू की गई है। इसका पिछले दो साल में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस योजना की सफलता का मुख्य कारण लोगों की इसमें सहभागिता है, क्योंकि कोई भी योजना जनता के सहयोग के बिन सफल नहीं हो सकती।
हलगरा में स्थानीय ग्रामीण पिछले 45 दिन से श्रमदान कर रहे थे। मुख्यमंत्री के आगमन की खबर से वे उत्साहित थे। मुख्यमंत्री सुबह-सुबह ही निलंगा तालुका पहुंचे और हलगारा गांव की ओर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री फडनवीस हलगरा पहुंचते ही सबसे पहले श्रमदान स्थल पर गए। मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना पाकर बड़ी संख्या में लोग फावड़ा और घमेला लेकर श्रमदान करने पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने खुद 25 मिनत तक श्रमदान किया और फावड़े से जमीन के अंदर दो फीट मिट्टी खोदकर मेड़ बनाई। मुख्यमंत्री श्रमदान करने वालों से बातचीत करते हुए उनका उत्साह वर्धन भी करते रहे। बहरहाल, शिवार संवाद के बाद मुख्यमंत्री गांव में गए और किसानों के साथ बैठकर नाश्ता किया। नाश्ते में निलंगा का मशहूर राइस और और सुशीला लिया। गांव वालों को कहना था कि राज्य के मुख्यमंत्री का आम के खेत से आकर हमारे यहां नाश्ता करना हमारे लिए गौरव की बात रही।
---------------------------------------------------------------------------------------------------------- Disclaimer हमे आप के इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करे और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य मे कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह ईमेल hindustankiaawaz.in@gmail.com भेज कर सूचित करे । साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दे । जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।
लातूर, 25 मई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आज यहां कहा कि राज्य को अगर सूखे और जल संकट से पूरी तरह उबारना है तो राज्य के सिंचाई और पानी के स्रोतों का विकास करना ही होगा। यह समय की मांग भी है, एक बार राज्य में जल स्रोतों का अच्छी तरह से विकास कर लिया गया तो राज्य में फिर कभी भी सूखा नहीं पड़ेगा।
जलयुक्त शिवार योजना का जयजा लेने राज्य के दौरे पर निकले मुख्यमंत्री श्री फड़नवीस ने लातूर के निलंगा तहसील के हलगरा गांव में किसानों से बातचीत करते हुए राज्य में मौजूद जलस्रोतों के विकास पर जोर दिया। यहां श्रमदान के बाद शिवार संवाद का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर लातूर के पालक मंत्री संभाजी पाटील-निलंगेकर, लोकसभा सदस्र सुनील गायकवाड, जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माणिक गुरसल,पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवाजीराव राठोड़ समेत बड़ संख्या में अधिकारी और किसान मैजूद थे।
हलगरा गांव के निवासियों द्वारा आपसी सहयोग से किये गए जलयुक्त शिवार कार्य की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विविध योजनाओं का लाभ लेकर जिस तरह रालेगण सिद्धि स्वावलंबी बना, उसी तरह हलगरा गांव को भी स्वावलंबी बनना चाहिए। श्री फड़नवीस ने कहा,"सिनेमा में नायक कुछ ही मिनटों में गांव का कायापलट कर देता है, पर वह काल्पनिक होता है. परंतु यहां आप लोगों ने मिलकर जलयुक्त शिवार योजना पर काम किया है तो मेरी नजर में असली हीरो आप सब हैं। गांववासियों के यह कार्य देखकर मैंने हलगरा गांव को दत्तक लिया है और इस गांव को सारी योजनाओं का लाभ दिलवाऊंगा।"
पानी के महत्व के बारे में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां जल वहीं जीवन हैं। पानी समाप्त यानी जीवन की भी समाप्ति। छत्रपति शिवाजी महाराजा ने भी पानी का महत्व समझा था तभी उनके समय में हर किले में पानी की योग्य व्यवस्था की थी। श्री फड़नवीस ने कहा, "भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जब देश के सिंचाई मंत्री थे तब के बड़े बांधों का निर्माण उन्होंने करवाया था। इन बांधों का निर्माण करते समय ही उन्होंने जल संरक्षण के कार्य को भी महत्व दिया था। इसका यह अर्थ हुआ कि हमें भी पानी की हर बूंद का महत्व पता होना चाहिए। गांव वालों को ये संकल्प लेना चाहिए कि वो पानी का एक एक बूंद गांव की ज़मीन में ही सुरक्षित रखकर पानी के मामले में गांव को स्वावलंबी बनाएंगे।"
श्री फड़नवीस ने कहा कि जल स्वतंत्रता की लड़ाई में सभी लोगों को एकत्र होना होगा। देश की बड़े बांधों में से 40 प्रतिशत बांध राज्य में हैं। इसके बावजूद यहां 80 प्रतिशत फसल होती है। यहां सूखे की समस्या प्राकृतिक ना होकर मानव द्वारा निर्मित है। इसलिए जलयुक्त शिवार पर बड़े पैमाने पर काम होना अत्यंत आवश्यक है। जलयुक्त शिवार योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससो पहले जल संरक्षण की अनेक योजनाएं चलाई जा रही थीं। इसलिए 14 योजनाओं को मिलाकर जलयुक्त शिवार योजना शुरू की गई है। इसका पिछले दो साल में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस योजना की सफलता का मुख्य कारण लोगों की इसमें सहभागिता है, क्योंकि कोई भी योजना जनता के सहयोग के बिन सफल नहीं हो सकती।
हलगरा में स्थानीय ग्रामीण पिछले 45 दिन से श्रमदान कर रहे थे। मुख्यमंत्री के आगमन की खबर से वे उत्साहित थे। मुख्यमंत्री सुबह-सुबह ही निलंगा तालुका पहुंचे और हलगारा गांव की ओर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री फडनवीस हलगरा पहुंचते ही सबसे पहले श्रमदान स्थल पर गए। मुख्यमंत्री के आगमन की सूचना पाकर बड़ी संख्या में लोग फावड़ा और घमेला लेकर श्रमदान करने पहुंच गए। मुख्यमंत्री ने खुद 25 मिनत तक श्रमदान किया और फावड़े से जमीन के अंदर दो फीट मिट्टी खोदकर मेड़ बनाई। मुख्यमंत्री श्रमदान करने वालों से बातचीत करते हुए उनका उत्साह वर्धन भी करते रहे। बहरहाल, शिवार संवाद के बाद मुख्यमंत्री गांव में गए और किसानों के साथ बैठकर नाश्ता किया। नाश्ते में निलंगा का मशहूर राइस और और सुशीला लिया। गांव वालों को कहना था कि राज्य के मुख्यमंत्री का आम के खेत से आकर हमारे यहां नाश्ता करना हमारे लिए गौरव की बात रही।
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