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भिवंडी के  शांतिनगर स्थित मक्का मस्जिद में कोरोना संक्रमित मरीजों के  उपचार  के लिये निःशुल्क आक्सीजन की अस्थायी व्यवस्था की गई है। कोरोना मरीजों को यह सुविधा जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, एमपीजे एवं मक्का मस्जिद के शांतिनगर ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध कराई गई है। उक्त  प्रकार की  जानकारी देते हुये डॉ. रियाज शेख ने बताया कि सांस लेने में कठिनाई का सामना कर रहे रोगियों की सहायता के लिये ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ पांच बेड लगाये गये हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक 108 मरीजों को आक्सीजन उपलब्ध कराया गया है,जिनकी जांच के लिये मालेगांव से डॉक्टरों की टीम भी आई थी। इसके अलावा जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने अपने घरों में मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्रदान करने के लिये भी निःशुल्क सेवा शुरू की है। इस सुविधा का शहर के सभी धर्म और जाति के लोग लाभ उठा रहे हैं ।
  गौरतलब है कि  भिवंडी में अनलॉक के बाद कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ने के कारण शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट आ गया था । जिसमें कोरोना संक्रमित मरीजों का समय पर पर्याप्त उपचार नहीं हो पा रहा था और कोरोना संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों के लिये क्वारंटीन की सुविधा का भी अभाव था। कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुये मनपा प्रशासन  द्वारा  कोरोना संक्रमण के श्रृंखला को तोड़ने के लिये 18 जून से तीन जुलाई तक लॉकडाउन कर दिया है।
 भिवंडी एक बहुत ही भीड़भाड़ वाला शहर है, जिसके परिणाम स्वरूप कोरोना का संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। शहर के बहुत से चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमण के भय से अपना क्लीनिक बंद कर दिया है ।जमाअत ए इस्लामी हिंद भिवंडी के अध्यक्ष मौलाना  औसाफ़ अहमद फ़लाही बताते हैं कि शहर के अधिकांश लोगों में इस बीमारी के बारे में जागरूकता की कमी है और वे उपचार का खर्च उठाने में भी असमर्थ हैं। जिसके कारण हम लोगों ने ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध करने का फैसला किया ।  इस सुविधा से अभी तक 80 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीजों को स्वास्थ लाभ हुआ है।इसके अलावा 8 मरीजों को उनके घरों पर 15 सिलेंडर उपलब्ध कराया गया है ।इस सुविधा का शहर के सभी धर्म और जाति के लोग लाभ उठा रहे हैं ।
 खिदमत-ए-ख़ल्क (मानवता की सेवा) इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से एक है, मस्जिद केवल नमाज़ अदा करने का स्थान नहीं है, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्रों में रहने वालों के लिये कल्याणकारी काम करने वालों के लिये एक सामुदायिक केंद्र माना जाता है। मक्का मस्जिद लॉकडाउन के कारण बंद पड़ी हुई थी,हमने मस्जिद के कुछ परिसर को उपयोग करने का फैसला किया। जहां प्रभावितों की  सहायता हो  सकती थी, इनमें ऐसे प्रभावित लोग भी हैं जो कहीं और उपचार की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते थे।इस प्रकार की प्रतिक्रिया  क़ैसर मिर्ज़ा ट्रस्टी,शांतिनगर ट्रस्ट ने व्यक्त की है। 

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