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मनपा में जारी मनमाने कार्यभार  तथा लेखाविभाग द्वारा पिछली तारीखों का धनादेश बनाये जाने की जानकारी प्राप्त होते ही  मनपा आयुक्त डॉ. पंकज अशिया ने लेखाविभाग से सभी चेकबुक अपने पास जमा करा लिया है। लेखाविभाग ने मनपा आयुक्त द्वारा चेकबुक जमा कराने की पुष्टि की है।इस संदर्भ में  मनपा आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन मनपा आयुक्त न ही फोन उठाया और न ही मैसेज का कोई उत्तर  दिया है। मनपा आयुक्त  द्वारा  इस प्रकार की  कार्रवाई से मनपा गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है।
   मनपा लेखाविभाग सूत्रों के अनुसार तत्कालीन मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर ने अपने स्थानांतरण की सूचना मिलते ही कई फाइलों पर पिछली तारीखों में हस्ताक्षर कर दिया था,जिसमें कई ठेकेदारों की फाइलों का समावेश  है। सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन मनपा आयुक्त डॉ.प्रवीण  आष्टीकर द्वारा पिछली तारीखों में निपटाई गई फाइलों के अनुसार लेखा विभाग द्वारा उनके भुगतान के लिये धनादेश बनाया जा रहा था ।जिसकी भनक लगते ही नवनियुक्त मनपा आयुक्त डॉ. पंकज अशिया ने लेखाविभाग से धनादेश का बुक ही मंगा लिया। लेखाविभाग से धनादेश बुक मंगाये जाने की जानकारी के लिये मनपा आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया ,उन्हें मैसेज भी किया गया, लेकिन मनपा आयुक्त ने न ही फोन उठाया और न ही मैसेज का कोई  उत्तर  दिया है। 
    उक्त संदर्भ में लेखाविभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर ने इस प्रकार की लगभग 150 फाइलों पर पिछली तारीखों में हस्ताक्षर किया था, जिसमें कई फाइलें लॉकडाउन के दौरान अनाप-शनाप  किये गये खर्च की फाइलें  भी शामिल थीं ।लेखाविभाग के अधिकारी ने बताया कि मनपा आयुक्त से किसी ने शिकायत कर दिया था, जिसके कारण उन्होंने धनादेश बुक जमा करा लिया है। उन्होंने बताया कि मनपा आयुक्त ने खर्च पर नियंत्रण करने के लिये धनादेश बुक जमा कराया है । उनके आदेश पर ही धनादेश बनाया जा रहा है।
    उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर के स्थानांतरण की सूचना मिलने के बाद भिवंडी के कुछ स्थानीय पत्रकार उनका साक्षात्कार लेने के लिये गये थे, उस समय मनपा आयुक्त के टेबल पर लगभग 150 से अधिक फाइलें रखी  हुई थी । फाइलों को देखकर पत्रकार भी हक्का-बक्का रह गये कि उनके टेबल पर कभी इतनी फाइलें रहती नहीं  थी।उसी दौरान फाइलों को जल्दी से जल्दी निपटाने के लिये मनपा के किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन भी आ रहा था। मनपा के अधिकारी द्वारा फोन लगाये जाने के बाद तत्कालीन मनपा आयुक्त बात करने के लिये अपने चेंबर में चले गये थे जो शहर में  चिंता व चर्चा का विषय बना हुआ है।     

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