मुंबई, मध्य रेल मुख्यालय छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई के राजभाषा विभाग द्वारा दिनांक 17.08.2017 को हिंदी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर जी की 101वीं जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर मध्य रेल के मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉ. श्याम सुंदर, आमंत्रित अतिथि व्याख्याता रेलवे हिंदी सलाहकार समिति के माननीय सदस्य डॉ. गजभान मुकुट शर्मा जी तथा आमंत्रित अतिथि व्याख्याता, सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षाविद श्री नवीन चतुर्वेदी एवं मध्य रेल के उप महाप्रबंधक (राजभाषा) श्री विपिन पवार ने अमृतलाल नागर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया ।
मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉ. श्याम सुंदर ने अपने संबोधन में अमृतलाल नागर जी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि जिस तरह बंगला भाषा में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने विविध विधाओं पर अपनी कलम चलाई है, उसी प्रकार अमृतलाल नागर जी ने हिंदी साहित्य में उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, रिपोर्ताज,बाल साहित्य, अनुवाद आदि विधाओं में साहित्य सृजन कर विश्व स्तर के साहित्यकारों में अपना नाम दर्ज कराया है ।
समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए रेलवे हिंदी सलाहकार समिति के माननीय सदस्य डॉ. गजभान मुकुट शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि साहित्य समाज का दर्पण है और समाज में घटित होने वाली घटनाओं, पात्रों, प्रसंगों को कलमबद्ध किया जाता है तो यह घटनाएं, पात्र, प्रसंग, जीवंत हो उठते हैं। आपने अमृतलाल नागर जी साहित्य में व्यक्ति और समाज के सापेक्षिक संबंधों को चित्रित किया और उनकी अनेक रचनाओं की चर्चा की ।
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षाविद श्री नवीन चतुर्वेदी जी ने नागर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी सम्मोहित करने वाली शैली में अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए तथा बताया कि नागर जी का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है, जिसका प्रतिबिंब उनके साहित्य में दृष्टिगोचर है। आपने आगे बताया कि सत्य और कल्पना का समिश्रण ही साहित्य होता है, क्योंकि इतिहास में स्थान, तारीख एवं व्यक्तियों के नामों के अलावा सब कुछ झूठ होता है तो इसके विपरीत साहित्य में स्थान, तारीख और व्यक्तियों के नामों के अलावा सब कुछ सच होता है। आपने नागर जी के जीवन एवं साहित्य के अनेक प्रसंगों की चर्चा करते हुए बताया नागर जी को उनके पितामह ने यह सलाह दी थी कि अपनी लेखन में किसी की निंदा नहीं करना और इस सलाह का पालन नागर जी ने अपने जीवन भर किया ।
उप महाप्रबंधक (राजभाषा) श्री विपिन पवार ने अपने उद्बोधन में अमर साहित्यकार अमृतलाल नागर की 101वीं जयंती के अवसर पर अमृतलाल नागर जी का विस्तृत जीवन परिचय दिया एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के अनेक पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए । उन्होंने कहा कि आज सुप्रसिद्ध हिंदी विद्वान, कोशकार एवं रामकथा पर हिंदी में पीएचडी करने वाले फादर कामिल बुल्के की पुण्यतिथि भी है । आपने फादर कामिल बुल्के का विस्तृत जीवन परिचय देते हुए कोशकार के रूप में उनके द्वारा किए गए महान कार्य को रेखांकित किया ।
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Disclaimer हमे आप के इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करे और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य मे कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह ईमेल hindustankiaawaz.in@gmail.com भेज कर सूचित करे । साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दे । जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।
मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा निदेशक डॉ. श्याम सुंदर ने अपने संबोधन में अमृतलाल नागर जी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि जिस तरह बंगला भाषा में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने विविध विधाओं पर अपनी कलम चलाई है, उसी प्रकार अमृतलाल नागर जी ने हिंदी साहित्य में उपन्यास, कहानी, नाटक, संस्मरण, रिपोर्ताज,बाल साहित्य, अनुवाद आदि विधाओं में साहित्य सृजन कर विश्व स्तर के साहित्यकारों में अपना नाम दर्ज कराया है ।
समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए रेलवे हिंदी सलाहकार समिति के माननीय सदस्य डॉ. गजभान मुकुट शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि साहित्य समाज का दर्पण है और समाज में घटित होने वाली घटनाओं, पात्रों, प्रसंगों को कलमबद्ध किया जाता है तो यह घटनाएं, पात्र, प्रसंग, जीवंत हो उठते हैं। आपने अमृतलाल नागर जी साहित्य में व्यक्ति और समाज के सापेक्षिक संबंधों को चित्रित किया और उनकी अनेक रचनाओं की चर्चा की ।
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं शिक्षाविद श्री नवीन चतुर्वेदी जी ने नागर जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपनी सम्मोहित करने वाली शैली में अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए तथा बताया कि नागर जी का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है, जिसका प्रतिबिंब उनके साहित्य में दृष्टिगोचर है। आपने आगे बताया कि सत्य और कल्पना का समिश्रण ही साहित्य होता है, क्योंकि इतिहास में स्थान, तारीख एवं व्यक्तियों के नामों के अलावा सब कुछ झूठ होता है तो इसके विपरीत साहित्य में स्थान, तारीख और व्यक्तियों के नामों के अलावा सब कुछ सच होता है। आपने नागर जी के जीवन एवं साहित्य के अनेक प्रसंगों की चर्चा करते हुए बताया नागर जी को उनके पितामह ने यह सलाह दी थी कि अपनी लेखन में किसी की निंदा नहीं करना और इस सलाह का पालन नागर जी ने अपने जीवन भर किया ।
उप महाप्रबंधक (राजभाषा) श्री विपिन पवार ने अपने उद्बोधन में अमर साहित्यकार अमृतलाल नागर की 101वीं जयंती के अवसर पर अमृतलाल नागर जी का विस्तृत जीवन परिचय दिया एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के अनेक पहलुओं पर अपने विचार प्रकट किए । उन्होंने कहा कि आज सुप्रसिद्ध हिंदी विद्वान, कोशकार एवं रामकथा पर हिंदी में पीएचडी करने वाले फादर कामिल बुल्के की पुण्यतिथि भी है । आपने फादर कामिल बुल्के का विस्तृत जीवन परिचय देते हुए कोशकार के रूप में उनके द्वारा किए गए महान कार्य को रेखांकित किया ।
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