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संवाददाता, भिवंडी । पर्युषण पर्व के अवसर पर अशोकनगर के श्री जिनकुशलसुरि दादावाड़ी के प्रांगण में साध्वी डॉ. शासनप्रभाजी ने कहा कि कल्पसूत्र में हम भगवान महावीर का आदर्श जीवन चरित्र सुनते हैंं। उनके जीवन की सर्वोत्कृष्ट विशिष्टता आग्हार-विचार की समानता थी। उन्होंने वही कहा जैसा स्वंय जिया। केवल ज्ञान के आलोक में सत्य का साक्षार कर जीवन की यथार्थता को प्रतिपादित किया। आज विश्व में आसुरी प्रवृतियों का बोलबाला हैै। भौतिकता के विकास ने मानव का विनाश कर दिया है, सुविधाओं ने शांति के बदले अशांति दी है। दूरसंचार और आवागमन के संस्धानों ने विश्व की भौगोलिक दूरी को जरूर कम किया है पर मनुष्य-मनुष्य के बीच हृदय की दूरी बढ़ गई है। आर्थिक लोभवृत्ति ने भाई-भाई को लड़ा दिया है। पारस्परिक वैमनस्य चरम सीमा पर पहुंच गया है। मानव दिग्भर्मित होकर समस्याओं के चौराहे पर खड़ा है। ऐसे माहौल में परमात्मा महावीर के सिद्धांत ही विश्व का कल्याण कर सकते हैंं। उनके अज़र,अमर और समय निरपेक्ष तीनों सिद्धांत विश्व को नई दिशा देने में पूर्ण सक्षम हैं।
 साध्वी श्री ने कहा कि अहिंसा परमात्मा महावीर का महत्वपूर्व सिद्धांत है। जिसे अपनाना आज की महती आवश्यकता है, महावीर ने नारा दिया था 'जियो और जीने दो'। यह नारा आज भी बहुत उपयोगी और सार्थक है। उन्होंने कहा कि हिंसा को हिंसा से नहीं मिटाया जा सकता है। अहिंसा के सहारे दुनिया में शांति स्थापित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने आर्थिक विषमता,भोगवृत्ति और शोषण की समाप्ति के लिए मानव जाति को अपरिग्रह का सिद्धांत दिया है। आधुनिक विश्व को पतन की ओर ले जाने तथा भेदभाव की कृत्रिम दीवार खड़ी करके समाज में विषमता उतपन्न करने का कारण परिग्रह ही है। इसीलिये परमात्मा ने इस सिद्धांत द्वारा इच्छाओं पर नियंत्रण करने का उपदेश दिया। निश्चित ही परमात्मा के इस कल्याणकारी सिद्धांत को अपनाकर मानव विश्व शांति स्थापित कर सकता है। पर्युषण महापर्व का आयोजन अशोकनगर के श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ द्वारा किया गया है।     

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