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इमारत में किराये पर रहने वाले 18 परिवार हुये बेघर  ।

 भिवंडी।एम हुसेन। भिवंडी में गत  सप्ताह से धोखादायक एवं जर्जर इमारतों की दुर्घटना होने का सिलसिला थमने का नाम नहींं ले रहा है ।गौरतलब है कि  पीरानीपाड़ा में एक इमारत के अचानक गिरने के बाद गैबीनगर की यह तीसरी धोखादायक इमारत है ,जिसके छत का प्लास्ट टूटकर गिरने के कारण मनपा द्वारा उसे तुरंत खाली करा लिया गया है ।मनपा प्रशासन की सतर्कता से एक बार फिर एक बड़ी दुर्घटना टल गई लेकिन इसमें किराये पर रहने वाले 18 परिवार बेघर हो गये हैं ,धोखादायक इमारतों के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उसमें रहने वाले बेघर हुये लोगों को सड़क पर रहने का समय आ गया है ।
   गैबीनगर स्थित फैजुल उलुम मदरसा ट्रस्ट की मिल्कियत सुन्नी जामा मस्जिद चाल घर क्रमांक- 792 पर लगभग 42 वर्ष पुरानी दो महले की इमारत थी। जिसमें 18 परिवार किराये पर रहते थ। मनपा द्वारा इस इमारत को सितंबर 2016 में ही धोखादायक घोषित करके इमारत को खाली करने की नोटिस दिया गया था।मनपा द्वारा 28 सितंबर 2016 को इमारत तोड़ने की कार्रवाई भी शुरू की गई थी। वहां की बिजली आपूर्ति भी खंडित कर दी गई थी। मनपा द्वारा इमारत में रहने वाले लोगों के विरुद्ध 188 का मामला भी दर्ज किया गया था  लेकिन इसमें किराये पर रहने वाले लोगों ने मनपा को शपथपत्र देते हुये कहा था कि इसे वे लोग जल्द ही खाली करके गिरा देंग। लेकिन तीन वर्ष बीतने के बाद भी उसमें रहने वाले लोगों ने उसे खाली नहीं किया था। शुक्रवार को इमारत के पहले महले के छत का प्लास्टर टूटकर गिरने के बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया था ।छत का प्लास्टर गिरने की सूचना मिलते ही मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर द्वारा इमारत को तुरंत खाली करने का अनुरोध किया गया । 
   इस घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन विभाग प्रमुख ईश्वर अड़ेप, प्रभाग समिति क्रमांक-दो के सहायक आयुक्त सुनील भोईर,कार्यालय अधीक्षक हनुमंत म्हात्रे मनपा टीम के साथ घटनास्थल  पहुंचकर पूरी इमारत को खाली करा दिया। मनपा कर्मचारियों ने शांतिनगर पुलिस की सहायता से उसमें रहने वाले 18 परिवारों का सामान बाहर निकाल दिया।मनपा द्वारा उसकी बिजली एवं जलापूर्ति खंडित करके उसे बंद कर दिया गया है।

   बतादें कि इस इमारत में रहने वाले किरायेदारों से मस्जिद ट्रस्ट से पिछले तीन वर्षों से इमारत को खाली करने के लिये विवाद चल रहा था ।  इस इमारत में पिछले 42 वर्षों से रहने वाले लोगों का विवाद था कि नई इमारत बनने के बाद उसमें उन्हें पुनः निवास मिलेगा। इस इमारत में रहने वाली एक वृद्ध महिला ने सवाल किया है कि 42 वर्ष इमारत में रहने के बाद वे लोग रहने के लिये अब कहां जायें?   

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