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भिवंडी। एम हुसेन । देश में पहले तिलक स्मारक के रूप में प्ररसिद्ध भिवंडी के तिलक मंदिर सभागृह की ऐतिहासिक इमारत 99 वर्ष की हो गई है। अनेक घटनाओं की गवाह बनी यह इमारत इस वर्ष 100 वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, वाचन मंदिर के कार्यकारिणी सदस्य यशवंत कुंटे बताते हैं कि तिलक मंदिर सभागृह की पहचान भिवंडी के टाउन हाल के रूप में है।
   बतादें कि महादेव जोगलेकर ने सन 1918 में तिलक मंदिर के इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया था जो जुलाई 1920 में इस इमारत का निर्माण कार्य पूरा  हो गया था। महादेव जोगलेकर शुरुआत में इस इमारत का नाम अपने पिता के नाम पर करना चाहते थे लेकिन एक अगस्त को लोकमान्य तिलक की मृत्यु होने पर इसी सभागृह में उनके शोकसभा का आयोजन किया गया था, जिसके बाद महादेव जोगलेकर ने इस इमारत का नामकरण लोकमान्य तिलक के नाम पर करने का प्रस्ताव रखा।  शुरू में मयूरेश वाचनालय के नाम से कार्यरत था  लेकिन 28 जून 1928 को इसके पदाधिकारियों का गठन करके उनके सुपुर्द कर दिया गया था। बाद में 14 अक्टूबर 1933 को वाचन मंदिर में विलय कर लिया गया था उसके बाद तिलक मंदिर सभागृह की देखभाल एवं मरम्मत आदि का काम वाचन मंदिर की ओर से किया जा रहा है। तिलक मंदिर के दीवार पर महापुरुषों का बनाया गया चित्र देश के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करता है।
  वाचन मंदिर के कार्यकारिणी सदस्य यशवंत कुंटे ने बताया कि वाचन मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पी.बी.भावे,व्यंकटेश माडगुलकर, साने गुरूजी महराज,वसंत वापट, एस.एन.नवरे, विद्याधर गोखले,कुसुमाग्रज आदि साहित्यकार आ चुके हैं। हीराबाई बडोदेकर,राम मराठे,वसंतराव देशपांडेय,रामदास कामत आदि के गायन का कार्यक्रम भी हो चुका है। बालासाहेब ठाकरे,राम कापसे एवं जी.पी.प्रधान जैसे महान नेता भी यहां आ चुके हैं, यहां ग्राहक संघ,लायंस क्लब,राष्ट्रीय उत्सव मंडल,शिवजयंती उत्सव मंडल,सार्वजनिक गणेशोत्सव सहित अन्य मंडलों की नियमित सभा भी इस वाचन मंदिर में होती थी। भगनी मंडल स्कूल एवं नवभारत एज्युकेशन सोसायटी इंग्लिश स्कूल भी कुछ दिनों तक इस वाचन मंदिर में ही चलाया गया था। रिक्शा यूनियन,म्युनिस्पल मजदूर यूनियन,होटल कामगार एवं अन्य कामगार संगठनाएं भी सभा आदि के लिए इसी सभागृह का उपयोग करते थे। 

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