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 भिवंडी के विभिन्न क्षेत्रों में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों को निःशुल्क शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की जवाबदारी संबधित स्कूल की है ।आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों से कई स्कूलों द्वारा डोनेशन मांगा जा रहा है और उनसे शुल्क वसूलने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं ।डोनेशन न देने वाले छात्रों को अभी तक उन्हें शैक्षणिक सामग्री नहीं दी गई है जिसकारण आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों का शैक्षणिक भविष्य धोखे में आ गया है।इस प्रकरण में पंचायत समिति शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों के विरुद्ध कोई कार्रवाई करने के बजाय केवल नोटिस देकर कागजी घोड़ा दौड़ाया जा रहा है जिससे आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों के अभिभावकों ने स्कूल व्यवस्थापन के इस मनमानी काम के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी  है ।  
  बतादें कि भिवंडी तालुका के भावाले स्थित ऑल सेंट हाईस्कूल,सोनाले स्थित प्रेसीडेंसी स्कूल,अंजुर स्थित संस्कार इंग्लिश मीडियम स्कूल एवं कोनगांव स्थित बेन्जिर इंग्लिश स्कूल सहित दर्जनों स्कूल ऐसे हैं जहां आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को आरटीई के तहत प्रवेश दिया गया है। लेकिन कई स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों को स्कूल प्रशासन द्वारा शैक्षणिक समाग्री नहीं दी गई है।शैक्षणिक सामग्री देने के लिए स्कूल प्रशासन द्वारा आधा शुल्क भरने के लिए हुकुमशाही फतवा निकाला गया है । स्कूल प्रशासन के इस फतवे से अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त है । अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रशासन सहित पंचायत समिति के गट विकास अधिकारी से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले छात्रों को न्याय नहीं मिला है।जिससे आर्थिक रूप से पिछड़े  छात्र शैक्षणिक समाग्री पाने से वंचित हो गए हैं।जिन्हें सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश दिलाकर शिक्षित करना चाहती है।शैक्षणिक सामग्री पाने से वंचित छात्रों के अभिभावकों ने न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है ।    
उक्त संदर्भ में माधव पाटील - गट शिक्षणाधिकारी,पंचायत समिति,भिवंडी ने बताया कि
इस प्रकरण में मेरे पास शिकायत आने के बाद संबंधित स्कूल को नोटिस दी गई है।नोटिस देने के बावजूद स्कूलों द्वारा यदि आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को शैक्षणिक समाग्री उपलब्ध नहीं कराई गई तो उनके विरुद्ध जिला परिषद के शिक्षणाधिकारी के पास कार्रवाई करने की सिफारिश की जाएगी।    
वही  श्रीकांत भोईर- कार्यकर्ता, शिक्षण आरोग्य अधिकारी मंच  ने कहा कि
पंचायत समिति के गट शिक्षणाधिकारी से शिकायत करने के बाद भी आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को शैक्षणिक सामग्री नहीं दी गई है ।
इसी प्रकार गजानन देवकाते- अभिभावक ने बताया कि
आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले जूनियर,सीनियर एवं केजी के छात्रों को स्कूल द्वारा शैक्षणिक सामग्री दी गई थी। पहली कक्षा में केवल पुस्तक दिया गया है लेकिन उन्हें गणवेश सहित अन्य सामग्री नहीं दी गई है।

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