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भिवंडी। एम हुसेन ।भिवंडी मनपा के सीमांतर्गत अनेक क्षेत्रों में अवैध  बांधकाम शुरू है इस बाबत मनपा के संबंधित विभाग के समक्ष समय समय से शिकायत की गई है परंतु मनपा द्वारा किसी प्रकार की कोई  कार्रवाई नहीं की जा रही है जिसकारण मा.उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए गत १० जुलाई को  आदेश पारित कर अवैध इमारत के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए आदेश दिया था परंतु उक्त अवैध बांधकाम को संरक्षण देने वाले जिससे इमारत खडी  रही ऐसे जवाबदार  प्रभाग अधिकारी व उनके सहकर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन कार्रवाई करने की मांग  पत्रकार वेंकटेश रापेल्ली ने ज्ञापन द्वारा की  है। उक्त निवेदन की प्रति उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष सहित राज्य के मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव एवं नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सहित भिवंडी मनपा आयुक्त को दिया गया  है।
उक्त संदर्भ में भिवंडी मनपा  प्रभाग समिति क्र.२ अंतर्गत मौजे नागांव पीरानीपाडा स्थित सिटी सर्वे नं. ९८/२०, घर नं.२४३१ जो  तलमहला सहित अधिक पांच इस प्रकार कुल छह महले की अवैध  इमारत प्रभाग अधिकारी व उनके सहकर्मचारियों के आशीर्वाद से निर्माण की गई थी ।उक्त अवैध  इमारत  बाबत सफीर अहमद गुलाम दस्तगीर ने भिवंडी मनपा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया था परंतु संबंधित प्रभाग अधिकारी सुनील भोईर व इनके  सहकर्मचारियों द्वारा उक्त शिकायत पर जानबूझकर व आर्थिक व्यवहार करके दुर्लक्ष किया गया है इसलिए  उच्च न्यायालय में शिकायतकर्ता ने अपील प्रस्तुत किया है जिसकी याचिका क्र.२०६१/२०१८ है। उक्त याचिका में दिसंबर २०१८ को  अवैध  इमारत निष्कासित करने बाबत निर्णय लिया गया जिसके अनुसार ९ जनवरी  २०१९ को बंदोबस्त लगाया गया था  परंतु मा.उच्च न्यायालय के विरुद्ध भिवंडी के दिवाणी न्यायालय ने एड इंटरिम आदेश दिया जिसके बाद इमारत को नही तोडा गया परिणामस्वरूप यह उच्च न्यायालय अवमान है।इसी प्रकार उच्च न्यायालय द्वारा ७ जून २०१८ को दिए गए निर्णय में भिवंडी मनपा अवैध  बांधकाम निष्कासित करने में असफल साबित होने पर याचिका दाखिल करने में दर्शाया गया है।इसी प्रकार प्रभाग अधिकारी द्वारा पेश किए गए ॲफिडेविट बोगस हैंं।इसी प्रकार इस काम में प्रतिवादी क्र.५  अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त दीपक कुरलेकर ने सहायता करने के कारण अवैध बांधकाम हुआ है इस प्रकार का स्पष्ट निर्णय उच्च न्यायालय ने दिया है।
उक्त संदर्भ में मा.उच्च न्यायालय निर्णय में दर्शाया गया है कि  सुनील भोईर द्वारा दिए गए ॲफिडेविट  न्यायालय को दिशाभूल करने वाला है, पूर्व १९ अप्रैल २०१८ को सुनील भोईर ने हस्ताक्षर किया है कि ऐसे द दस्तावेज जिसकी किसी प्रकार की जांच नहीं किया है तथा  १९ अप्रैल को  सुनिल भोईर हस्ताक्षर करते हुए बताया है कि इन्होने कार्यालयीन अधीक्षक के पास कोई भी जांच नहीं की है। भोईर द्वारा किए गए स्टेटमेंट एवं स्पष्टीकरण पर किसी भी दृष्टिकोण से मा.उच्च न्यायालय समाधान नहीं हो सकता है ऐसा निर्णय में दर्शाया गया है। जिससे  यह सिद्ध होता है कि प्रभाग अधिकारी सुनील भोईर तथा उपायुक्त दीपक कुरलेकर अवैध बांधकाम का पूर्ण रूप से संरक्षण प्रदान कर रहे हैं इसलिए इन दोनों के विरुद्ध निलंबन कार्रवाई की जाए।
भिवंडी मनपा के उक्त भ्रष्ट अधिकारियों की निष्क्रियता को संज्ञान में लेते हुए  उच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में आदेश दिया गया है कि संपत्ति क्र.२४३१ को तीन दिन के भीतर निष्कासित करने के लिए  उच्च न्यायालय ने १० जुलाई को सुनवाई करते हुए  दिया था।उक्त आदेशानुसार प्रभारी मनपा आयुक्त सुधारक देशमुख ने अधिकारियों को  साथ में लेकर तत्काल प्रभाव से उक्त अवैध इमारत का निरीक्षण कर  इमारत तोडने का  काम दिन व रात शुरू कराया। इस काम के लिए १२ से १४ जुलाई तक सभी छुट्टी रद्द कर दी गई थी जिसके अनुसार सभी विभाग प्रमुख को काम पर  हाजिर रहकर इमारत तोडने स्थित उपस्थित रहने के लिए आदेश दिया गया था जिसकारण अनावश्यक रूप से सभी अधिकारी व कर्मचारियों को छुट्टी से वंचित रहना पडा। उक्त आदेश के कारण सभी विभाग प्रमुखों को हाजिर रहना पडा।उक्त संदर्भ में अपील कर्ता वेंकटेश रापेल्ली ने मांग की है कि मनपा आयुक्त द्वारा दिए गए आदेशानुसार उक्त अवैध इमारत तोडने हेतु पूर्व अनेक वर्षों से जिन्होंने कार्रवाई न करते हुए उच्च न्यायालय की अवमानना करते हुए केवल कुर्सी गरम करते रहे हैं  ऐसे निष्क्रिय उपायुक्त दीपक कुरलेकर व प्रभाग अधिकारी सुनिल भोईर के विरुद्ध मनपा प्रशासन अविलंब निलंबन कार्रवाई  की जाए तथा इनका वेतन और इंक्रीमेंट भी रोका जाए। 

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