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कचरा ठेकेदार तथा स्वच्छता व आरोग्य विभाग के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर कुछ बोगस बिल मनपा के लेखा विभाग द्वारा जमा की जा रही है। उक्त प्रकार की बिल में से  ४ करोड ५० लाख रूपये के बिल पर उपायुक्त के बोगस हस्ताक्षर करके यह बिल लेखपाल के पास जमा करने का मामला आरोग्य विभाग की उपायुक्त वंदना गुलवे द्वारा  उजागर किया गया है। इस बाबत इन्होंने  मनपा आयुक्त मनोहर हिरे  को लिखित शिकायत पत्र देकर रिपोर्ट प्रस्तुत किया है।परंतु संबधित के विरुद्ध फौजदारी कारवाई करने के लिए टालमटोल किया जा रहा है जिसकारण मनपा के प्रति आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।गौरतलब है कि भिवंडी शहर महानगरपालिका में स्वच्छ भारत अभियान अंतर्गत ५० करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध हुआ है। इस सरकारी अनुदान पर आंख गाडे हुए कचरा ठेकेदार व मनपा अधिकारियों ने सांठगांठ कर बोगस बिल निकाल कर मनपा को लूटने का प्रयत्न किया गया है।उल्लेखनीय है कि भिवंडी महानगरपालिका के ४१३ करोड़ रुपये का विविध विभाग के लेखा परिक्षण का अहवाल घोटाला के संदर्भ में जांच शुरू है उसके बावजूद बोगस हस्ताक्षर करके ठेकेदार द्वारा लाखों रुपये का बिल निकाले जाने का मामला मनपा में उजागर हुआ है जिससे मनपा में हडकंप मचा हुआ है। उक्त प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच कराई जाए इस प्रकार की मांग भाजपा नगरसेवक व  विरोधी पक्ष नेता श्याम अग्रवाल ने किया है। ज्ञात हो कि मनपा कार्यक्षेत्र में सार्वजनिक रास्ते पर जमा कचरा घंटागाडी व कचरा ठेकेदारों द्वारा डम्पर व जेसीबी की सहायता से योग्य पध्दती से उठाया नहीं जाता है।परिणामस्वरूप विविध प्रभाग में कचरों व गंदगी का साम्राज्य फैला हुआ है। इसके बावजूद मनपा अधिकारियों द्वारा बोगस हस्ताक्षर करके कुछ घंटागाडी के ठेकेदारों ने काम योग्य पध्दती से किया है ऐसा चित्र प्रस्तुत कर के काम का लाखों रुपये का बिल की फाइल पर वरिष्ठ अधिकारियों के बोगस हस्ताक्षर करके करोड़ों रुपये का बिल निकालने का प्रयत्न शुरू कर दिया है।उक्त मामला आरोग्य उपायुक्त वंदना गुलवे के संज्ञान में आते ही इन्होंने ठेकेदारों द्वारा बोगस हस्ताक्षर किया गया है उनके बिल का भुगतान न करें इस प्रकार की रिपोर्ट मार कर  लेखापाल विभाग को दिए हैं और  ठेकेदारों के विरुद्ध फौजदारी कार्रवाई करने के लिए यह बोगस हस्ताक्षर प्रकरण आयुक्त मनोहर हिरे के समक्ष प्रस्तुत किया है। मनपा आयुक्त ने यह प्रकरण मनपा विधि विभाग के पास फौजदारी कार्रवाई के लिए भेज दिया है। परंतु आश्चर्य की बात यह है कि एक वरिष्ठ नगरसेवक के दबाव के चलते विधि विभाग द्वारा फौजदारी का मामला दर्ज कराने के लिए टालमटोल किया जा रहा है।उक्त प्रकरण में संरक्षण देने वाले नगरसेवक की पुष्टि होने के बाद इस प्रकरण की मनपा आयुक्त मनोहर हिरे से जांच कराने की मांग जोर पकडती जा रही है, जिससे मनपा के भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों में हडकंप मचा हुआ है।

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