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संवाददाता, भिवंडी ।  भिवंडी तालुका क्षेत्र अंतर्गत पिलंझे गांव के चिचपाडा में संचालित आंगनवाडी में आदिवासी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार के नाम पर निकृष्ट दर्जे का अंडा और  सड़े हुए फल आपूर्ति किए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। गौरतलब है कि इस योजना से जुड़े लाभार्थी महिलाओं और बच्चों के अभिभावकों ने अधिकारी को ज्ञापन देकर आंगनवाड़ी सेविका  के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। ज्ञात हो कि समाज में कुपोषण टालने के लिए आदिवासी व अत्यंत गरीब बच्चों तथा  गर्भवती महिलाओं को राज्य शासन की ओर से एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेविका के माध्यम से पौष्टिक आहार की आपूर्ति की जाती है। जिसके अंतर्गत अंडे और केले तथा  अनाज भी आपूर्ति किया जाता है ।लेकिन भिवंडी तालुका के पिलांझे ग्राम पंचायत अंतर्गत चिचपाडा स्थित आंगनवाड़ी  सेविका द्वारा आदिवासी बच्चों और गर्भवती महिलाओं को निकृष्ट दर्जे का अंडा और सड़ा हुआ केला दिया जा रहा है। जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के  आयोग्य को धोका बना हुआ है ।उक्त आंगनवाड़ी के अंतर्गत लाभार्थी 28 बच्चों की पालक मां तथा गर्भवती महिलाओं ने निकृष्ट दर्जे के वस्तुओं की आपूर्ति की शिकायत बाल विकास प्रकल्प अधिकारी से करते हुए  की है कि आंगनवाड़ी महिला सेविका के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता महिलाओं में सविता सवर ,देवयानी पवार, वंदना लोखंडे, उज्जवला डबले,पारू पवार, कल्पना लोखंडे आदि महिलाओं ने योजना अधिकारी को दिए निवेदन में कहा है कि सड़े हुए अंडे और सड़े हुए केले खाने से आदिवासी बच्चे और गर्भवती महिलाएं बीमार पड़ रही है  इसलिए प्रकल्प अधिकारी आंगनवाड़ी सेविका द्वारा आपूर्ति किए जा रहे घटिया दर्जे के खाद्य पदार्थ की जांच कर उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें।
*** इस संदर्भ में एकात्मिक बाल विकास सेवा योजना अधिकारी, आनगांव बालाजी कोरे ने कहा है कि उक्त आंगनवाड़ी के लाभार्थी बच्चों के अभिभावकों व गर्भवती महिलाओं की शिकायत मिली है। जिसके लिए शिकायतकर्ता व आंगनवाड़ी सेविका को समक्ष करके सत्यता की जांच होगी यदि दोषी पाई गई तो आंगनवाड़ी सेविका के विरुद्ध निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।


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