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लखनऊ कहने को तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश को भयमुक्त समाज बनाने के लिये काफी प्रयासरत है लेकिन उत्तर प्रदेश की पुलिस सुधारने का नाम नही ले रही है बल्कि प्रदेश की पुलिस आये दिन बेलगाम होती जा रही है और कब किसके साथ किस तरह का ब्यवहार कर बैठे कहना मुश्किल है एक तरफ केन्द्र सरकार द्वारा  बेटी बचाओ बेटी पढाओ को काफी महत्व  दिया जा रहा हैतो वही दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश मे पुलिस द्वारा बेटियों के साथ आये दिन दुर्व्यवहार करने व आपत्ति जनक शब्दों का  प्रयोग करने के मामले सामने आ रहे है  इसी तरह का एक मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला मे एक कोतवाल द्वारा दिवानी कचहरी देवरिया  की  महिला    अधिवक्ता के साथ दुर्व्यवहार करने तथा कोतवाल द्वारा महिला अधिवक्ता पर अमार्यादित टिप्पणी करने का मामला प्रकाश मे आया है !
 बताते चले कि  साथी अधिवक्ता के सहयोग में गई महिला अधिवक्ता के साथ रुद्रपुर कोतवाल द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने पर डिस्ट्रीक बार एसोसिएशन ने कड़ा रोष जताया है। कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बार एसोसिएशन के मंत्री प्रेम नारायण मणि त्रिपाठी की अध्यक्षता में संघ का प्रतिनिधिमंडल एसपी से मिलकर ज्ञापन दिया। वही मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन तहसीलदार को सौपा ।
 दीवानी न्यायालय की महिला अधिवक्ता वंदना सिंह अपने साथी आशा पांडेय के जमीन संबंधी मामले में रविवार को रुद्रपुर कोतवाली गई थी। वंदना सिंह का आरोप है कि कोतवाल ने उन्हें अपना परिचय पत्र दिखाने को कहा। साथ ही अपमानजक टिप्पणी करते हुए दुर्व्यवहार किया। उन्होंने इसकी सूचना तत्काल संघ के अध्यक्ष सिहासन गिरि को दी। अध्यक्ष की ओर से कोतवाल से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन कोतवाल ने अध्यक्ष से बात नहीं की और फोन काट दिया। वंदना सिंह के साथ दुर्व्यवहार से आहत अधिवक्ताओं ने सोमवार को बैठक कर कोतवाल के रवैये पर विरोध जताया। आचरण में सुधार  लाने
> और  अमर्यादित व्यवहार को लेकर मंत्री की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल एसपी से मिला। मंत्री प्रेम नारायण मणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच सीओ से कराकर अवगत कराने को कहा है।
 गौर करने वाली बात यह है कि एस पी ने कोतवाल पर तत्काल कार्रवाई क्यो नही किया और मामले को जॉच हेतु सीओ को भेज दिया जबकि कोतवाल द्वारा महिला अधिवक्ता के साथ  दुर्व्यवहार करने की पुष्टि भी हो चुकी थी  आखिर मे किसके दबाव मे एस पी ने उक्त कोतवाल पर तत्काल कार्रवाई नही किया !
 वही मंगलवार को अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा जिसमें कोतवाल व एसडीएम के व्यवहार की जाचं व निलम्बन की मांग की गई । इस दौरान प्रेम नारायण मणि त्रिपाठी , वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामप्रसाद कुशवाहा सहित आदि अधिवक्ता मौजूद रहे ं। 

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