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-देर से प्रारम्भ हुआ था रेस्क्यू आपरेशन, जिससे बच्ची की हो गई थी मौत
- समय से राहत कार्य में जुटा होता प्रशासन तो शायद बच सकती थी बच्ची 
-70 फीट गहरे बोर में जीवन की जंग से लड़ती रही मासूम बिटियां
-लापरवाही से बालिका की आवाज हुई बन्द, 4 घंटे बाद पहुंची प्रशासन की टीम

मीरजापुर,हिन्दुस्तान की आवाज, संतोष देव गिरी

मीरजापुर। तकरीबन 70 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन वर्षीया बालिका की आखिरकार प्रषासनिक लापरवाही की वजह से सांस थम गई। समय रहते यदि त्वरित गति से बचाव के प्रयास के किए गए होते तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी, लेकिन नहीं घटना होने के तकरीबन चार-पांच घंटे बाद प्रषासनिक स्तर से बचाव कार्य प्रारंभ होने से काफी देर हो चुका था। परिणामस्वरूप बोरवेल में गिरी बालिका की लाष निकली जिसे देखते ही परिजनों सहित ग्रामीणों का कलेजा फटा का फटा रह गया। घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोष भी देखा जा रहा है। जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के सहरसा गांव में सोमवार को मां के साथ खेत की ओर गयी बालिका जमीन के गहरे बोर में गिर गयी। जानकारी होते ही परिजनों में कोहराम मच गया था। जानकारी होने पर मौके पर पहुंची लालगंज थाना पुलिस व प्रशासन की टीम देर रात तक उसे बचाने के प्रयास में जुटी रही। बताते चले कि कि गांव निवासी महबूब अली ने अपने खेत मंे तीन माह पूर्व बोरवेल मशीन से आठ इंच का बोर कराया था। उस समय बोर में पानी नही मिला था जिससे वह बोर को खुला ही छोड़ दिया। नजीर के खेत के बगल में सूर्यलाल आदिवासी का खेत है। सूर्यालाल अपने खेत में गौशाला बनाकर पशुओं को रखता था। सूर्यालाल की पत्नी मंजू सोमवार को सांय अपनी तीन वर्षीया पुत्री रुपांजली के साथ पशुओं को पानी पिलाने गयी थी। रुपांजली को एक स्थान पर बैठाकर मंजू पशुओं को पानी पिलाने लगी थी। कुछ देर बाद रुपांजली मां की नजरों से ओझल हो गयी। जब मंजू का ध्यान बेटी की ओर गई तो वह उसे ढूंढने लगी लेकिन वह कहीं दिखलाई नहीं दी तो अचानक उसकी नजर बोर के गड़ढे ओर पड़ी तो वह बोर के पास पहुंची तो अंदर बेटी को देख उसकी सांसें थम गयी। रुपांजली को गोंद में उठाने के लिए वह ज्यों ज्यों आगे बढ़ती गयी वह वैसे वैसे बोर की तरफ खिसकती गयी। कलेजे के टुकड़े को ज्यों ही उठाना चाही बालिका बोर में सर...से सरक गयी। नीचे सत्तर फिट गहरे बोर से रोने की आवाज तो आ रही थी पर विवषता यह की उसकी मां लाचार बनी हुई कुछ कर नहीं पा रही थी। मंजू की चीख पुकार सुन कर उसकी ओर दौड़े ग्रामीणों ने टार्च की रोशनी में देखा तो बोर के अंदर तो मासूम सही सलामत थी। सूचना होने पर मौके पहुंची सौ नंबर पर पीआरबी पुलिस द्वारा बचाव के लिए जेसीबी से खुदाई कराकर मासूम बालिका को बचाने का प्रयास किया जाने लगा था। पुलिस के साथ लोगों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के लोगों को भी इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन जब तक स्वास्थ विभाग की टीम मौके पर पहुंची तब तक बोर से बालिका की आवाज सुनाई देनी बंद हो चुकी थी। बोर में आक्सीजन देने व बचाव के प्रयास जारी थे। मौके पर उपजिलाधिकारी मड़िहान सविता यादव, सीओ आपरेशन केपी सिंह व अन्य अधिकारी कर्मचारी डटे रहे। वहीं स्थानीय पुलिस जेसीवी से खुदाई कर बोर में गिरी बालिका को निकलने का प्रयास कर रही थी करीब 12 फिट खुदाई के बाद बोरवेल के अंदर मिट्टी दरकने लगी तो खुदाई बंद कर दिया गया इसके बाद वाराणसी से एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई, लेकिन रात 9 बजे तक वह भी नहीं पहुंच पाई थी। रात 9 बजे के बाद एनडीआरएफ टीम द्वारा दो प्रयास हुआ जो विफल रहा रस्सी व पाइप के सहारे मासूम को बोरवेल से पांच फीट ऊपर लाया गया, लेकिन कुछ उपर आने के बाद फिर नीचे की ओर वह खिसक गई। ऐसे में मौके पर जमंे ग्रामीणों में जहां गम के साथ आक्रोष देखा जा रहा था वहीं मासूम बालिका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो उठा था। अंततः काफी प्रयास के बाद बालिका को बोरवेल से कांटे में फंसा कर निकाला गया तो लेकिन तब तक उसकी सांसे थम चुकी थी। जिसे जिला अस्पताल लाया गया जहां उसे देखते ही चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। दूसरी ओर सूर्यलाल की तहरीर पर पुलिस ने बोर करवाकर खुला छोड़ देने वाले महबूब अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया जो घटना के बाद से ही फरार होना बताया जा रहा है।


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