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प्रतापगढ़ / हिन्दुस्तान की आवाज / मोहम्मद मुकीम शेख

सीडब्ल्यूसी मेंबर ने पत्रकार वार्ता में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र की किया घेराबंदी, बोले-प्रियंका गांधी का सीतापुर जेल मे किसानहित मे यातना सहना विधेयक वापसी मे कांग्रेस का किसानों को अहम समर्थन का नतीजा


लालगंज, प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य तथा आउटरीच एण्ड कोआर्डिनेशन कमेटी के यूपी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने कहा है कि तीन कृषि कानूनों को पीएम द्वारा वापसी के ऐलान के बावजूद अभी भी किसान को मोदी सरकार की नीति और नीयत पर विश्वास नही हो पा रहा है। उन्होने कहा कि किसानों की आशंका इसलिए बनी हुई है क्योकि प्रधानमंत्री ने कृषि कानूनों के वापस लेने की घोषणा मे यह कहकर कि सरकार एक वर्ग को चाहकर भी तीनों कृषि कानूनों की अच्छाईयां समझा नही पाई के जरिए यह आशंका जता दी है कि तीनों कृषि कानून की वापसी संभवतः यह किसान आंदोलन को झटका देने के लिए क्षणिक युद्ध विराम है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपनी घोषणा मे यह स्पष्ट करना चाहिये था कि सरकार कृषि कानूनों को देश भर के किसानो के विरोध के चलते वापस लेने का यह सरकारी निर्णय है। शनिवार को नगर स्थित क्षेत्रीय विधायक आराधना मिश्रा मोना के कैम्प कार्यालय पर पत्रकार वार्ता मे सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि किसानो के इस आंदोलन मे सबसे महत्वपूर्ण समर्थन सड़क पर उतरकर उत्तर प्रदेश मे विरोध पक्ष का नेतृत्व कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने किया। उन्होने कहा कि गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक कांग्रेस का किसान आंदोलन को खुला समर्थन व प्रियंका गांधी का तीन दिनों तक किसानो के हित के लिए सीतापुर जेल मे यातनाएं सहते हुए बिताये जाने के चलते भी मोदी सरकार इन तीनों काले कृषि कानूनो को वापस लेने के लिए मजबूर हो गयी। श्री तिवारी ने किसानों के अभी भी जारी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि मोदी सरकार आखिर न्यूनतम समर्थन मूल्य की भी इसी समय घोषणा क्यूं नही कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने छत्तीसगढ़ मे कांग्रेस सरकार का उदाहरण रखते हुए कहा कि जब तक मोदी सरकार किसानों के धान व गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी पचीस सौ रूपये प्रति क्विंटल न कर दे किसान आंदोलन इसी तरह शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से जारी रखा जाना चाहिये। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार से कांग्रेस की तरफ से यह भी पुरजोर मांग रखी कि सरकार एमएसपी से कम पर धान तथा गेहूं खरीदने वालो के कृत्य को कानून के जरिए संज्ञेय अपराध भी घोषित करे। वार्ता के दौरान प्रमोद तिवारी ने भाजपा सरकार पर तंज कसा कि मोदी सरकार ने तीनों काले कृषि कानून को वापस ले लिये जाने की घोषणा अपना अस्तित्व बचाने के लिए करने को मजबूर हुई है। उन्होनें किसान आंदोलन से जुडे मौजूदा सियासी हालात को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि हरियाणा मे अल्पमत भाजपा सरकार से दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के दस विधायको ने विधेयक वापस न लेने की स्थिति मे समर्थन वापसी की मजबूरी बयां कर दी थी। बकौल प्रमोद तिवारी ऐसे मे हरियाणा सरकार चंद दिनों की मेहमान थी और उसका गिरना तय हो गया था। वहीं प्रमोद तिवारी ने अकाली दल द्वारा भी एनडीए सरकार से अपने गठबंधन को इन्हीं तीनों कृषि कानूनों को लेकर तोड़ने के चलते भाजपा पर पंजाब मे अकेले जनता के बीच जाने का साहस नहीं बटोर पाने को भी कानून वापसी का वेबसी भरा कदम ठहराया है। श्री तिवारी ने मोदी सरकार पर कडा हमला बोलते हुए कहा कि जिन तीनों काले कृषि कानूनों से किसान की किसानी तथा उपज व आमदनी पर सरकार गहरी चोट पहुंचा रही थी, ऐसे मे यह आश्चर्य का विषय है कि किसान बाहुल्य देश मे एक सरकार ने किसानों पर काला कानून थोपने के समय संसद मे एक दिन की भी बहस स्वीकार्य नही की। पंजाब मे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के द्वारा अपने मुखमंत्रित्व काल मे पंजाब विधानसभा मे इन तीनो काले कृषि कानूनो के खिलाफ विधेयक पास कराये जाने का हवाला देते हुए प्रमोद ने तंज कसा कि अमरिंदर के सामने भी बेवसी बनी हुई थी कि वह इन कृषि कानूनो के रहते कैसे और किस मुंह से भाजपा के करीब जाते। श्री तिवारी ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर ने पहले ही तीनों कृषि कानूनों के रहते पंजाब और कृषि किसान बाहुल्य राज्यों मे भाजपा के साथ गठबंधन की संभावनाओं से इंकार भी कर दिया था। वही सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने राजस्थान मे भी हनुमान बेलीवॉल की पार्टी द्वारा भाजपा से गठबंधन तोडने को भी इन कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार का खुद अलग थलग पड़ जाना करार दिया। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की अविश्वसनीयता पर भी बडा सवाल खडा करते हुए कहा कि भले ही सरकार ने अहंकार को दबा कर यह कानून वापस लेने की घोषणा की है किंतु जिस तरह से मोदी जी ने गोवा मे चुनाव के दौरान कहा था कि नोटबंदी के लिए जनता उन्हें सिर्फ पचास दिन सौंप दे किंतु मोदी सरकार के आज तक पचास दिन पूरे नही हो सके। ऐसे मे प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार ने भले ही कृषि कानूनों को वापस लेने का कडवा घूंट पिया है किंतु उसके पलटवार की आशंका मे किसान इस घोषणा से अभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नही हैं। इसके पूर्व प्रमोद तिवारी ने कैम्प कार्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर किसान आंदोलन के दौरान विधायक मोना के नेतृत्व मे किये गये संघर्ष को लेकर हौसलाआफजाई की। किसान विधेयको की वापसी की सरकारी घोषणा के ठीक एक दिन बाद रामपुर खास पहुंचे प्रमोद तिवारी का पार्टी कार्यकर्ताओं को रानीगंज कैथौला, सांगीपुर, घुइसरनाथ धाम मे भी जोरदार स्वागत करते देखा गया। इस मौके पर प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल, चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, सांगीपुर प्रमुख अशोक सिंह बब्लू, आशीष उपाध्याय, छोटे लाल सरोज, सुधाकर पाण्डेय, ददन सिंह, कमल सिंह, पप्पू तिवारी, कुंवर ज्ञानेंद्र सिंह, त्रिभु तिवारी, सत्येंद्र सिंह आदि रहे।

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