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कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा ने महिला आयोग तथा अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग को सरकार पर लगाया प्रभावहीन किये जाने का आरोप

 आराधना मिश्रा मोनालालगंज, प्रतापगढ़। कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने प्रदेश मे महिला आयोग के कार्यकाल के समाप्त होने तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग मे भी अध्यक्ष व सदस्य के रिक्त पदों को लेकर कडी चिंता जताई है। उन्होने सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा तथा दलित उत्पीडन की घटनाओ की रोकथाम को लेकर इसे लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण भी करार दिया है। गुरूवार को यहां जारी बयान मे सीएलपी नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि केन्द्र की मोदी और योगी सरकार का यह रवैया जनता के प्रति उसके उत्तरदायित्व पर सवाल खडा करते हुए लोकतंत्र विरोधी सोच को सामने ला रहा है। उन्होने कहा कि महिला आयोग का गठन कांग्रेस की सरकार ने इसलिए किया था कि यदि महिलाओ के सम्मान और अधिकार की रक्षा मे कोई परेशानी आती है तो वह इस आयोग का दरवाजा खटखटा सके। उन्होने कहा कि हाथरस की घटना के साथ साथ प्रदेश मे महिला उत्पीडन की इस समय बाढ़ आ गई है। सीएलपी नेता ने भाजपा सरकार को आडे हाथो लेते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था इस तरह भयावह हो गयी है कि प्रदेश के हर कोने मे रोज इधर बलात्कार और महिलाओं के उत्पीडन की घटनाएं बेकाबू हो उठी है। उन्होने यह भी आरोप लगाया है कि योगी सरकार मुख्य सूचना आयुक्त के पद को भी न्यायालय के बार बार फटकार लगाने के बावजूद इसलिए नही भर रही है ताकि प्रदेश मे भ्रष्टाचार तथा अपराध पर सरकार से कोई सवाल सामने न आ सके। मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से सीएलपी नेता आराधना मिश्रा मोना ने हाथरस मे पहुंची कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी का एक पुलिसकर्मी कुर्ता पकड़ता है और सरकार विपक्ष पर पुलिस के द्वारा लाठियां बरसा रही है, ऐसे मे विपक्ष को गंभीर घटनाओ पर कहीं पर जाने से रोकने को लेकर यह साफ है कि यूपी मे लोकतंत्र संकट से गुजर रहा है। उन्होने यह भी आरोप लगाया कि हाथरस मे अब पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पीडिता के बजाय आरोपियो के पक्ष मे उतर आयी है। जबकि बकौल मोना प्रदेश महिला अपराध मे इस तरह जकड़ा हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट तक को कहना पडा कि उत्तर प्रदेश की स्थिति भयावह है। कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने प्रदेश की योगी सरकार पर बेटियो की सुरक्षा करने मे विफलता का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप की भी मांग की है।

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