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कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं आउटरीच कमेटी के यूपी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने केंद्र की मोदी सरकार पर कृषि विधेयको के जरिए किसानो के खून पसीने से उपजने वाली फसलो को मुटठी भर अमीर पूंजीपतियो की तिजोरी मे पहुंचाए जाने का कुचक्र करार दिया है। उन्होने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने तीन तीन किसान विरोधी बिल तो लाये पर इस काले कानून के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा कृषि मण्डियो को समाप्त किये जाने का स्पष्ट जाल भी बिछाया है। रविवार को विधायक आराधना मिश्रा मोना के कैम्प कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यसभा के सदस्यो के संविधान मे प्रदत्त अधिकार  के विपरीत इस कानून को पास कराए जाने मे मत विभाजन न कराकर एक बड़ा सवाल खडा किया है। उन्होनें सरकार पर कृषि विरोधी कानूनो को लाये जाने के पहले इसे सर्वदलीय समिति अथवा प्रवर समिति मे भी न भेजे जाने को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य प्रमोद तिवारी ने सरकार के अब किसानो को भ्रमित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बयानबाजी को आडे हाथो लेते हुए कहा कि यदि कांग्रेस यह मांग कर रही थी कि सरकार विधेयको मे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि एमएसपी पूर्ववत जारी रखेगी की भी लाइन बढ़ा देती तो इसमे क्या हर्ज है? श्री तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार तो ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह पहले भारत के किसानो से भले की बात करके जिस तरह उसने गुलाम बनाया उसी तरह आज यह सरकार भी मजदूरो के अधिकार छीन बैठी, नौजवानो को पिछले छियालिस सालो मे सबसे ज्यादा बेरोजगारी दी और अब देश के किसानो को उन्हीं के मालिकाना हक वाले खेतो मे मजदूर बनाना चाहती है। सीडब्लूसी सदस्य प्रमोद तिवारी ने बलपूर्वक कहा कि कांग्रेस किसानो की आवाज उठाएगी और जिस दिन कांग्रेस मे केंद्र की सरकार बनेगी उसके दूसरे दिन का सूरज उगने से पहले इस काले कानून को कांग्रेस खत्म करेगी। प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसान विरोधी कानून के वापस होने तक यह लडाई जारी रहेगी और यह भी सुनिश्चित कर रहे है कि सत्ता मे आते ही कांग्रेस किसानो का मालिकाना हक उनकी जमीन पर बना रहेगा तथा इन कंपनियो का भी बोरिया बिस्तर गोल करेगें। वहीं श्री तिवारी ने भारतीय जनसंघ के अटल आडवाणी युग के समय से गठबंधन की साथी रही शिरोमणि अकाली दल के भी भाजपा की मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए एनडीए गठबंधन से अलग होने को भी कृषि बिल के किसान विरोधी होने का पुख्ता सबूत करार दिया। राफेल युद्धक विमान को लेकर भी आउटरीच कमेटी के इंचार्ज प्रमोद तिवारी सरकार पर हमलावर दिखे। उन्होने कहा कि राफेल दुनिया का सबसे अच्छा विमान है किंतु मोदी सरकार इसकी तीन गुना कीमत चुका रही है। उन्होने कहा कि भारत को राफेल की अकूत कीमत के टेक्नोलॉजी को भी स्थानांतरित नही करने के कैग के खुलासे से भी यह साबित हो गया है कि जो राफेल विमान आ गये है उनका यदि कोई कलपुर्जा खराब होगा तो फ्रांस की ही दसॉल्ट एविएशन पर ही भारत को निर्भर होना होगा। श्री तिवारी ने कहा कि इससे यह भी साबित हो गया है कि राफेल की खरीद मे सरकार की अदूरदर्शिता भारत के हितो के साथ विश्वासघात और धोखा है। कोरोना महामारी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस महामारी से भयंकर मौतो का सिलसिला थम नही रहा है। ऐसे मे जबकि कोरोनाकाल के छः सात माह बीत जाने के बावजूद अभी तक सरकार रोज कमाने वाले, छोटे, लघु और मध्यम उद्यमी तथा किसान, बेरोजगार व मजदूर तथा रेड़ी लगाने वाले के हाथो मे मोदी सरकार कैश नही दे सकी है। उन्होने दुनिया के लगभग सभी आर्थिक संगठनो की इस घोषणा को भी गंभीर चिंताजनक ठहराया कि भारत देश भयंकर आर्थिक मंदी की ओर अग्रसर है और इसकी जीडीपी लगातार गिरावट की ओर दिख रही है। श्री तिवारी ने लालगंज कोतवाली के खेंमसरी गांव पहुंचकर हाल ही मे कमलेश सरोज की गोली मारकर हत्या को लेकर भी संवेदना जताई। उन्होने मृतक के घायल पिता रामलाल के स्वास्थ्य की जानकारी ली और विधायक मोना की ओर से मृतक की पत्नी को एक सरकारी आवास भी उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिलाया। कोतवाल से हत्याकांड की निष्पक्ष जांच कर दोषियो के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही। इसके पूर्व श्री तिवारी ने मादीपुर गांव पहुंचकर सभासद चंद्रप्रकाश शुक्ल उर्फ सोनू की मां प्रेमा देवी तथा बनवारी मे युवा इंका अध्यक्ष प्रीतेन्द्र ओझा के दादा तीर्थराज ओझा तथा मनीपुर गांव मे किसान नेता भानू प्रताप सिंह की मां राजकुमारी के आकस्मिक निधनों पर परिजनों से मिलकर संवेदना प्रकट की। इस मौके पर प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल, चेयरपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, ब्लाक प्रमुख ददन सिंह, सभासद रावेन्द्र मिश्र, छोटेलाल सरोज, नागेन्द्र अनुज, आशीष उपाध्याय, श्रीकांत मिश्र, पप्पू तिवारी, सौरभ शास्त्री, महमूदआलम, दयाशंकर तिवारी, विन्देश्वरी दुबे, सोनू मिश्र, विनय पाण्डेय, मुरलीधर तिवारी आदि रहे।

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