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भिवंडी ।एम हुसेन। शहर के सनोबर हाल वंजार पट्टी नाका स्थित  संविधान बचाओ संघर्ष समिति  द्वारा  आयोजित पत्रकार परिषद में आगामी 18 जनवरी को परशुराम टावरे स्टेडियम में सीएए, एनपीआर और एनसीआर के विरोध में होने वाली विशाल जनसभा की जानकारी देते हुए समिति के संयोजक एडवोकेट किरण चेन्ने ने बताया कि हमें सीएए नहीं शांति चाहिए, एनपीआर नहीं रोजगार चाहिए और एनसीआर नहीं अधिकार चाहिए। इस जनसभा में राज्य के काबीना मंत्री जितेंद्र आव्हाड, पूर्व न्यायाधीश बीजी कोलसे पाटील, किसान नेता डॉ. योगेंद्र यादव और जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद,शब्बीर अंसारी अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम ओ बी सी आर्गेनाइजेशन, मुजतबा फारूक़,श्रीमती बिंत हव्वा आदि  संबोधन  करेंगे।
      उक्त  अवसर पर किरण चेन्ने ने बताया कि इस विरोध सभा में शहर के तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों के अलावा बीजेपी सहित इक्का-दुक्का पार्टियों को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों के लोग और मुस्लिम संगठनों सहित संविधान में विश्वास रखने वाली तमाम तरह की संस्थाएं  शामिल  होंगी। किरण चेन्ने के अनुसार संविधान में नागरिकता बाबत स्पष्ट नियम होने के बावजूद सरकार को नागरिकता संबंधी किसी प्रकार के नए कानून लाने की जरूरत नहीं थी। लेकिन मौजूदा केंद्रीय सरकार अनावश्यक रूप से  नया काला कानून लाकर पूरे देश को परेशान कर रही है। इस कानून के तहत देश की सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द को खत्म करने सहित धार्मिक भेदभाव की खाई को बढाया  जा रहा है। क्योंकि इसमें सभी जाति-धर्म के लोगों को तो नागरिकता दी जाएगी। लेकिन मुसलमानों को इससे अलग रखा गया है। इस धार्मिक भेदभाव के चलते देश में अराजकता का माहौल पैदा हो गया है। आरएसएस की विचारधारा पर चलने वाली केंद्र की भाजपा सरकार मुसलमानों को दोयम दर्जे की नागरिकता के लिए जाति एवं धर्म को आधार बनाया है। मौजूदा सरकार का देश के संविधान पर विश्वास नहीं है और जो संविधान नहीं मानते वह देशद्रोही हैं। इसलिए भिवंडी के तमाम जागरूक लोगों ने मिलकर संविधान बचाओ संघर्ष समिति के तत्वावधान में  एकत्रित  होकर सभी धर्म के लोगों को साथ लेकर सीएए, एनपीआर और एनआरसी नामक काला कानून का पुरजोर विरोध करने के लिए आगामी शनिवार को  भिवंडी  के धोबी तालाब स्थित परशुराम  स्टेडियम में एक ऐतिहासिक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया  है  । जिसकी गूंज भिवंडी की गली से लेकर दिल्ली तक होगी । इस पत्रकार परिषद में काॅ विजय कांबले, मुफ्ती मोहम्मद हुजैफा, मौलाना औसाफ़ फलाही, मौलाना इम्तियाज फलाही, अब्दुल अजीज अशरफी, फाजिल अंसारी ने भी इस बिल का विरोध करते हुए अपने विचार  व्यक्त किए, उपस्थित मान्यवरों के प्रति  शादाब  उस्मानी ने आभार व्यक्त किया  ।संचालन  मो अली शेख ने किया। 

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