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 संवाददाता,भिवंडी।  भिवंडी में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बढ़ते प्रभाव का असर सभी माध्यम के स्कूलों पर पड़ रहा है। चाहे वह मनपा के स्कूल हों या फिर निजी स्कूल, अभिभावकों द्वारा अंग्रेजी स्कूलों को दिए जा रहे प्रतिसाद से सभी माध्यम के स्कूलों के लिए चुनौती बनती जा रही है। शिक्षकों को अब अपनी नौकरी बचाने के लिए स्कूलों में विभिन्न प्रकार के उपक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। अब देखना यह है कि इस वर्ष अंग्रेजी माध्यम के बजाय कितने अभिभावक मराठी,उर्दू एवं हिंदी सहित अपनी मातृभाषा के स्कूलों में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाते हैं।
    बतादें कि भिवंडी के विभिन्न क्षेत्रों में मनपा द्वारा संचालित 97 प्राथमिक स्कूल हैं जिसमें सबसे अधिक उर्दू माध्यम के 48 स्कूल,मराठी माध्यम के 32 स्कूल,तेलुगू माध्यम के 10 स्कूल,हिंदी माध्यम के छह स्कूल एवं कन्नड़ माध्यम के  एक स्कूल का समावेश है ।इस समय मनपा के विभिन्न स्कूलों में 828 शिक्षक कार्यरत हैं । अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के बढ़ते प्रभाव के कारण मराठी एवं हिंदी माध्यम के स्कूलों में छात्रों की संख्या दिनों-दिन कम होती जा रही है। पिछली संच मान्यता के अनुसार 60 शिक्षक कम हैं। प्रशासनाधिकारी विजय शिरसाठ ने जानकारी देते हुए बताया कि हैं कि शिक्षकों की कमी के कारण दूसरे शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। मनपा द्वारा 11 माध्यमिक स्कूल भी शुरू किया गया है ।
     मनपा स्कूलों के लिए मनपा की 48 इमारत हैं। जिसके कारण 48 इमारतों के अलावा कुछ स्कूल निजी इमारतों में भी चलाए जाते हैं लेकिन उनमें पढ़ने वाले छात्रों के खेलने के लिए अधिकांश स्कूलों में खेल मैदान भी नही है।कार्यानुभव एवं शारीरिक शिक्षा आदि के माध्यम से उनके मनोबल को बढ़ाने का प्रयास शिक्षकों द्वारा किया जाता है , लेकिन स्कूलों में खेल मैदान के अभाव के चलते मैदानी खेलों को प्रोत्साहन न दे पाने से छात्रों का शारीरिक एवं मानसिक विकास जो होना चाहिए वह नही हो पाता है। निजी स्कूलों के बजाय अधिक  से अधिक छात्रों को मनपा स्कूलों में प्रवेश लेने में प्रोत्साहित करने के लिये स्कूलों को डिजिटल करने का काम शुरू किया गया है। मनपा के 20 स्कूलों को डिजिटल बनाने का काम शुरू है।जिसमें मनपा प्रशासन द्वारा कंप्यूटर एवं प्रोजेक्टर आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।
   मनपा स्कूलों की इमारतों में सुरक्षा रक्षक की व्यवस्था न होने से वहां चोरी की घटनाएं भी घटित  होती हैं। प्राथमिक स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की कोई व्यवस्था न होने कारण चपरासियों का काम भी स्कूलों के शिक्षकों एवं उसमें पढ़ने वाले छात्रों को ही करना पड़ता है। मनपा द्वारा लगभग सभी स्कूलों में छात्रों के पीने के लिये पानी की व्यवस्था की गई  है। लेकिन उन स्कूलों में सीधे पाइप लाइन द्वारा जलापूर्ति करने के कारण बारिश के दौरान दूषित पानी पीना पड़ता है। मनपा के सभी स्कूलों में छात्रों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिये वहां वाटरप्यूरीफाई मशीन आदि लगाने की आवश्यकता है।
    सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत सभी छात्रों को किताबे  एवं मनपा द्वारा उन्हें गणवेश आदि उपलब्ध कराया जाता है
,हालांकि मनपा द्वारा छात्रों को पहले गणवेश एवं किताबों के साथ उन्हें जूता-मोजा एवं ठंडी के दिनों में स्वेटर भी उपलब्ध कराया जाता था। जिसके लिये भारी संख्या में गरीब एवं जरूरत मंद अभिभावक अपने बच्चों को मनपा स्कूलों में पढ़ने के लिये भेजते थे लेकिन मनपा प्रशासन ने आर्थिक तंगी का  राग अलापते हुए उन सभी सुविधाओं को बंद कर दिया है।जिससे बच्चे निजी स्कूलों के बजाय मनपा स्कूलों में प्रवेश लें जिसके कारण मनपा स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होती जा रही है।
   छात्रों के कलात्मक गुणों को प्रोत्साहित करने के लिये उन्हें स्कूली स्तर पर प्रतियोगात्मक स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है।जिसमें छात्रों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र भी दिया जाता है।लेकिन छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिये शहर स्तर पर प्रतियोगात्मक स्पधाओं को कराने की विशेष आवश्यकता है। भिवंडी पावरलूम उद्योग का माचेस्टर  एवं गोदामों वाला  शहर है।लेकिन उसके अनुसार यहां प्रशिक्षण देने के लिये कोई भी संस्था नहीं है जिसके कारण इन उद्योगों में प्रशिक्षित मजदूरों का अभाव हैं।जिस पर विशेष ध्यान देना चाहिए ।           

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