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भिवंडी। भिवंडी मनपा के जन्म-मृत्यु विभाग से जन्म प्रमाण पत्र मिलने के लिए सैकड़ों आवेदन जमा किया गया है  लेकिन जन्म-मृत्यु विभाग के कर्मचारियों की घोर लापरवाही   के चलते स्थानीय नागरिकों को जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र समय से नही मिल पा रहा है। जिसके कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 
     मालूम हो कि मनपा  क्षेत्र  के प्रसूतिगृहों एवं अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का नाम वहां के रजिस्टर में दर्ज करने के बाद प्रत्येक सप्ताह मनपा चिकित्सा विभाग उनका नाम दर्ज करता था । इसी प्रकार मृत्यु होने के बाद भी विभाग द्वारा उसका नाम दर्ज किया जाता था। जिसके बाद जन्म-मृत्यु विभाग में निबंधक के रूप में नियुक्त मनपा के मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया जाता था
 लेकिन जन्म-मृत्यु विभाग के कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण नागरिकों को समय पर प्रमाण पत्र नही मिल पा रहा है जो एक गंभीरसमस्या बनी हुई।
     प्राप्त जानकारी के अनुसार जन्म-मृत्यु विभाग में पिछले 10 वर्षों से नारायण तांबे काम कर रहे हैं।  इसी प्रकार प्रभाग समिति क्रमांक-पांच के सफाई कर्मचारी अनिल गोसाई प्रभाग समिति में हाजिरी लगाकर जन्म-मृत्यु विभाग में काम करते हैं ।स्थानीय नागरिकों द्वारा शिकायत करने के बावजूद भी इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई  जिसको लेकर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है । हालांकि समय पर जन्म प्रमाण पत्र न मिलने के संबंध में स्थानीय नागरिको की शिकायत मिलने के बाद मनपा आयुक्त मनोहर हिरे ने तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विद्या शेट्टी को हटाकर उनके स्थान पर  डॉ. राहिल अंसारी को नियुक्त किया था। लेकिन 31 मई को डॉ.राहिल अंसारी सेवानिवृत्त हो गए  हैं। जिसके बाद प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी पुनः मुख्य चिकित्साधिकारी को दे दी गई है।
   बतादें कि भिवंडी मनपा द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 15 स्वास्थ्य केंद्र चलाये जा रहे हैं। लेकिन उनमें से अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों में न तो डॉक्टर मिलते हैं और न ही उनका स्टॉफ मिलता है।मनपा का स्वंय का न तो कोई प्रसूतिगृह है और न ही कोई अस्पताल है।मजदूरों एवं गरीब परिवार की महिलाओं की प्रसूति के लिए सरकारी अस्पताल के नाम पर एक मात्र आईजीएम उपजिला अस्पताल है। जहां हमेशा भीड़ लगी रहती है जिसके कारण झोपड़पट्टी क्षेत्रों में घर पर ही प्रसूति हो रही है। जिससे महिलाओं को परेशानी एवं उनके लिए खतरा भी बढ़ गया है। मनपा का सबसे पुराना बीजीपी दवाखाना था  जिसकी इमारत काफी जर्जर होने के कारण इमारत खंडहार हो गई है जिसके कारण वहां के दवाखाना को कहीं स्थांतरित कर दिया गया है। इसके बावजूद यहां के कार्यसम्राट नगरसेवक व मनपा प्रशासन मनपा अस्पताल के बारे में कुछ करने के लिए कोई रूचि नहीं ले रहे हैं। 
             

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