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 संवाददाता ,भिवंडी। पर्यावरण संवर्धन के लिये वृक्षारोपण समय की आवश्यकता है लेकिन पर्यावरण के संवर्धन के मद्देनजर भिवंडी मनपा उद्यान विभाग द्वारा हरितक्षेत्र के लिये वृक्षारोपण करने के नाम पर मनपा को लगभग डेढ़ करोड़ रूपये का नुकसान करने का मामला प्रकाश में आया है।हालांकि उद्यान विभाग के लिये यह कोई नई बात नहीं है, इसी प्रकार  से प्रति वर्ष वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपया पानी में बहा दिया जाता है।
   गौरतलब है कि  पर्यावरण के संवर्धन के लिये केंद्र सरकार के अमृत योजना के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हरितक्षेत्र बनाने की योजना के तहत भिवंडी मनपा द्वारा गौरीपाड़ा स्थित स्व. परशुराम धोंडू टावरे स्टेडियम, दीवानशाह दरगाह परिसर एवं वरालादेवी उद्यान परिसर में वृक्षारोपण करने की फर्जी योजना बनाकर सरकार के पास प्रस्तुत किया था।मनपा आयुक्त मनोहर हिरे को दिए गए ज्ञापन में शिवसेना पदाधिकारी दीपक नागरे ने कहा है कि मनपा द्वारा वृक्षारोपण करने के लिये नियुक्त किये गये ठेकेदारों ने उद्यान विभाग की मिलीभगत से बिना वृक्षारोपण किए एक करोड़ 47 लाख आठ हजार 635 रूपये डकार लिया है।
      गौरतलब हो कि हरितक्षेत्र के लिये गौरीपाड़ा स्थित स्व. परशुराम धोंडू टावरे स्टेडियम एवं दीवानशाह दरगाह परिसर में हिंदुस्तान इंटरप्राइजेज नामक संस्था को 74 लाख 86 हजार 109 रूपये में और वरालादेवी उद्यान परिसर में बुबेर एंड इंटरप्राइजेज को 72 लाख 92 हजार 526 रूपये में वृक्षारोपण करने का ठेका दिया  गया था| मनपा द्वारा तीनों जगहों के हरितक्षेत्र के लिये दोनों संस्थाओं को एक करोड़ 47 लाख आठ हजार 635 रूपये का निविदा मंजूर किया गया था ।लेकिन दोनों ठेकेदारों ने न तो कोई पेड़ लगाया और न ही पेड़ो की वृद्धि के लिये वहां लाल मिट्टी और कंपोस्ट की खाद आदि डाला| इसके बावजूद उद्यान विभाग के अधीक्षक नीलेश शंखे द्वारा हिंदुस्तान इंटरप्राइजेज को 20 लाख रूपये और बुबेर एंड इंटरप्राइजेज को 30 लाख रूपये मंजूर करा दिय। दीपक नागरे ने बताया कि हरितक्षेत्र के लिये वृक्षारोपण करने के लिये संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च से लाल मिट्टी लाना चाहिये और उसकी रॉयल्टी भी भरना चाहिए। शिवसेना पदाधिकारी दीपक नागरे ने हरितक्षेत्र वाले तीनों जगहों पर बिना लाल मिट्टी एवं कंपोस्ट खाद आदि डाले ही उद्यान अधीक्षक द्वारा मंजूर कराये गए - 50 लाख रूपये सहित एक भी वृक्ष न लगाने की जांच करके कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नीलश शंखे- उद्यान अधीक्षक ने बताया कि
दोनों ठेकेदारों द्वारा लाल मिट्टी एवं खाद डालकर वृक्षारोपण करने के बाद ही निधि मंजूर कराई गई है  लेकिन यह भी सच है कि उसमें से अधिकांश वृक्ष सूख गए हैं । 

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