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राजगढ़/मीरजापुर। पटेहरा पुलिस चौकी क्षेत्र में  अनियंत्रित होकर दो मोटर साइकिल आपस में ही भिड़ गये ।जिससे बाइक चालक व सवार सभी घायल हो गये। घायलों में अंकुर 12 पटेहरा, वशिष्ठ 25 उनके साथ के रिश्तेदार पिंटू 22 व संतोष पाल  32 कुशियरिया पड़रिया जिनका इलाज निजी अस्पताल दीपनगर में किया गया।  घटना शुक्रवार के सुबह के बताई जा रही है इसमें अंकुर व संतोष गम्भीर रूप से घायल हो ने बताया जा रहे हैं।

: 22 माह बाद भी नहीं हो सका मृतक का वरासत
मीरजापुर। जिले के लोगों के लिए वरासत करा पाना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। राजस्व कर्मियों की मनमानी, धन उगाही तथा भू माफियाओं की कुदृष्टि और इनकी संयुक्त संलिप्तता का ही असर कहां जाएगा कि लोगों को  वरासत में नाम दर्ज कराने के लिए  पैरों की एड़ियां घिसनी पड़ जा रही है। मामला जिले के छानबे क्षेत्र का बताया जाता है। छानबे क्षेत्र के डंगहर गांव में 3 दिसंबर 16 को हुबराजी देवी की मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके परिजनों ने वरासत के लिए संबंधित अधिकारी विभाग के पास आवेदन किया हुआ था लेकिन दुखद है कि 22 माह बाद उसके इकलौते बेटे रामलाल का नाम वरासत के रूप में अभी तक  दर्ज नहीं हो सका है। तहसील दिवस व थाना समाधान दिवस जो कि लोगों को सुविधा के लिए सरकार द्वारा किया जा रहा है। ताकि लोगों के समस्याओं का समाधान त्वरित गति से किया जा सके लेकिन यह दिवस भी लोगों के लिए छलावा साबित हो रहा है। संबंधित कर्मचारी की लापरवाही का कार होकर  संबंधित किसान भुक्तभोगी बना हुआ है। माता की मृत्यु के 22 माह बाद भी उसका नाम वरासत में शामिल नहीं किया जा सका है जिसके लिए वह दर-दर की ठोकरें खाता फिर रहा है। मृतक के वारिस रामलाल ने बताया कि संबंधित लेखपाल हिला हवाली कर रहे हैं। उस गांव के प्रधान विपरीत होने के नाते कुटुंब रजिस्टर का नकल नहीं दे रहे हैं। जिससे वरासत की कार्यवाही लंबित पड़ी हुई है। परेशान किसान रामलाल ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया है। जबकि इस संदर्भ में संबंधित लेखपाल का कहना है कि प्रयास जारी है। सोचने वाली बात है कि 22 महीनों से ही प्रयास जारी है जो अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। ऐसे में आसानी से समझा जा सकता है कि बड़े मामलों में यह प्रयास कितने सालों में पूर्ण होता होगा।

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