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-रहम नहीं अधिकार चाहिए-बेटी को सम्मान चाहिए- हकीम

पट्टी (प्रतापगढ़)! तहसील क्षेत्र के अन्देवरी ग्राम पंचायत में तरुण चेतना संस्थान द्वारा *एक साथ राष्ट्रीय अभियान* के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बेटी बचाओ सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें समानता के युवा साथी और बेटियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक हकीम अंसारी मैसवा मैन ने कहा कि रहम नहीं अधिकार चाहिए बेटी को सम्मान चाहिए। इसलिए बेटी भी हमारे देश की शान हैं। अगर बेटी नहीं तो समाज की परिकल्पना करना संभव नहीं है। इस अवसर पर डॉक्टर अच्छे लाल बिंद ने बेटियों के सम्मान में कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। बेटों के बराबर बेटी को भी समाज में अधिकार व् अवसर मिलना चाहिए। इसी क्रम में तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने कहा कि बेटियां बोझ नही लाठी है ! बेटा तो केवल एक ही कुल को रोशन करता है, लेकिन बेटियां दो-दो कुल को रोशन करती हैं। दोनों ही परिवार को हरा भरा रखती हैं। मगर दुर्भाग्य है कि भारत में हर घंटे चार बच्चों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है। श्री अंसारी ने बताया की अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर वर्ष 2011 को प्रस्ताव पारित करके 11 अक्तूबर को अंतराष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। 11 अक्तूबर 2012 पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस था। जिसका मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के सशक्तिकरण व् मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है । बेटी सम्मेलन के इस अवसर पर बेटी और बेटे में भाषण प्रतियोगिता कराया गया। जिसका मुख्य बिंदु “बेटी पराई क्यों है” रहा। इस प्रतियोगिता में लड़के और लड़कियां  दोनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ते हुए उनसे आगे निकल गई और प्रथम स्थान

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