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जिले की प्रसिद्ध रंग संस्था द फैक्ट रंगमंडल, बेगुसराय  के कलाकार  खुशबू का एनएसडी में हुआ चयन खुशबु  बताती  हैं कि करीब सात वर्षों से प्रवीण कुमार गुंजन की संस्था फैक्ट रंगमंडल से जुड़े हुए है। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रवीण गुंजन सर के मार्गदर्शन से ही नाट्य विद्यालय में प्रवेश हेतु हमें सफलता मिली है।जीवन का संघर्ष मे खुशबू कुमारी बताती हैं कि वह जिस समाज में रह रही  हैं वहां पर नाटक में लड़कियों के लिए बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। पड़ोसी, माँ अरुण देवी व पिता स्वर्गीय सोगारथ साह से लगातार शिकायत किया करते थे एवं गरीबी के कारण भी लोगों को बुराई करने का मौका मिल जाता था। इसके बावजूद भी परिवार से मदद मिलता रहा है जिसके कारण आज यह सफलता मिली है आज यदि पिता जीवित होते तो सबसे ज्यादा खुशी उनके चेहरे पर होती। महिला रंगकर्मी खुशबू बेगूसराय के ग्राम डुमरी के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने अब तक करीब 15 से 20 नाटकों में बतौर अभिनेत्री अपनी अहम् भूमिका निभाई है।
विदित हों की राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली में प्रवेश हेतु देशभर के लिए कुल 26 सीटों का ही प्रावधान है अतः इस कठिन कंपटीशन में एक साथ पूरे बिहार से कुल तीन महिला  कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। जिसमें से खुशबु बेगुसराय से  तथा अन्य दो सीट समस्तीपुर से अन्नुप्रिया और पटना की सारिका भारती न सफलता हासिल किया।
बेगूसराय रंगमंच के इतिहास में 11 जुलाई 2018 स्मरणीय रहेगा। वजह आप जानते हैं- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली में प्रशिक्षण के लिए बेगूसराय से एक महिला रंगकर्मी का चयन होना।
अब मैं नये व इच्छुक रंगकर्मियों को अपना अनुभव बांटना चाहता हूँ जो रंगमंच में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
तो एक नज़र डालते हैं खुशबु के उन कामों पर जो हमारे साथ इन्होंने किया खुशबू कुमारी
शहर से मात्र 4 कि.मी. दूर डुमरी किन्तु पूरा ग्रामीण परिवेश। वर्ष 2008 में जब मैं माॅडर्न थियेटर फाॅउण्डेशन के माध्यम से "कम्यूनिकेशन स्किल एण्ड एक्टिंग क्लासेज" के दूसरे सत्र की तैयारी कर रहा था तो बतौर छात्रा इसने नामांकन करवाया। 2008 में ही इलाहाबाद में "बिदेसिया" की प्रस्तुति के लिए मैंने महिला दो की छोटी सी भूमिका दी। काफी लगन और मेहनत से इसने छोटे-बड़े बहुत सारे नाटक में भूमिका निभाया। संस्था ने विधिवत परीक्षा आयोजित किया, जिसमें खुशबू सहित 11 रंग छात्र/छात्राओं ने परीक्षा दी।
परीक्षक थे- राजीव रंजन श्रीवास्तव (MA. lnmu), सीताराम (वरिष्ठ चित्रकार), प्रवीण कुमार गुंजन (NSD), गणेश गौरव (NSD)।
खुशबू ने वर्ष 2008 से 2011 तक एम.टी.एफ. में बतौर सदस्य व अभिनेत्री लगातार मंच व नुक्कड़ नाटक के सैकड़ों प्रस्तुतियां की।
छोटी सी साईकिल पर सवार प्रतिदिन नियमित समय से आना, अनुशासन का पालन करना, खूब ईमानदारी से मेहनत करना खुशबू की खूबियाँ रही है।
हमारे यहाँ एक अनुशासन है- अनुपस्थिति से पूर्व सूचना देना, जिसका पालन खुशबू ने बखूबी निभाया।
सम्प्रति- विगत 6/7 वर्षों से फैक्ट रंगमंडल बेगूसराय से बतौर अभिनेत्री सक्रिय हैं।
बिहार  के इन तीनों महिला रंगकर्मियों को बधाई और शुभकामनाएं कि आपने बिहार  का नाम रौशन किया।
खुशबु की अबतक की रंग यात्रा काफी संघर्षों से भरी रही है।
रंगमंच की विडंबना है कि प्रशिक्षण पूर्व इतना लम्बा समय गुज़ारना होता है।
...और आगे तीन वर्ष वाद करियर के लिए पुन: संघर्ष।
उम्मीद करता हूँ कि तीनों रंगकर्मी अपने सपनों को पूरा करेंगे और बिहार  का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाएंगे।
नये रंगकर्मियों !
रंगमंच में "शाॅर्टकट" नहीं होता है।
बेगूसराय की  महिला अभिनेत्री खुशबू कुमारी के बारे मे जिनका चयन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली में हुआ
दो नाटक समीक्षकों की कलम से
(उन की लेख को महिला रंगकर्मी केंद्रित करने  के लिए कुछ परिवर्तन किया गया)

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