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नई दिल्ली, मई 11:- महाराष्ट्र को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी के दो पुरस्कार आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किए गए. केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से विज्ञान भवन में ‘20 वे औद्योगिक दिवस’ के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा हर्षवर्धन ने की प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के अध्यक्ष तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आशुतोष शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस समय उपस्थित थे.
 प्रौद्योगिकी आधारित उत्पादन का सफलतापूर्वक व्यवसायीकरण के लिए पुरस्कार
 पालघर जिले के पश्चिम वसई ग्राम में “ ए एन टी एस सिरामिक प्राइवेट लिमिटेड”  नामक कंपनी को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग श्रेणी का द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया. जिरकोनिया सिरेमिक उत्पादन तथा कार्बन सल्फर पात्र बनाने के लिए राष्ट्रपति श्री कोविंद के हाथों पुरस्कार प्रदान किया गया जो कंपनी के निदेशक सब्यास्ची रॉय तथा अश्विनी जैन ने स्वीकार किया. इस पुरस्कार में 15 लाख  रुपए की राशि तथा मानचिन्ह का समावेश है.
जिरकोनिया धातु भारत में बड़ी मात्रा में पाया जाता है परंतु इस धातु को निर्यात किया जाता है और इस से बनी हुई वस्तुओं को भारत में आयात किया जाता. इस धातु से बनने वाली वस्तुओं को अधिक मात्रा में संरक्षण दल उपयोग में लाते हैं. जिरकोनिया धातु से संरक्षण दल के लिए उपयोगी वस्तुएं सप्लाई करने का काम के एएनटीएस सिरामिक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी करती है जो भारत की ऐसी एकमात्र कंपनी है. उनके इस विशेष काम के मद्देनजर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया गया.
                              बायो टेक्नोलॉजी पुरस्कार
 पुणे जिला की निगडी ग्राम में ज्ञान प्रबोधिनी संस्था की शिक्षिका तथा वैज्ञानिक संगीता अतुल कुलकर्णी को जैव प्रौद्योगिकी(बायो टेक्नोलॉजी) विषय में छात्रों में रूचि निर्माण करने को लेकर तथा ग्रामीण संभागों में इसका प्रचार व प्रसार करने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन के हाथों “जैवतंत्रज्ञान सामाजिक विकास पुरस्कार” देकर सम्मानित किया गया. संगीता कुलकर्णी को यह पुरस्कार व्यक्तिगत तौर पर दिया गया जिसमें पांच लाख की नगद राशि और सन्मानचिन्ह का समावेश है. ज्ञान प्रबोधिनी निगडी की संस्था है जो सन 2002 से जैव प्रौद्योगिकी विषय की शिक्षा दे रही है. इस विषय में विभाग की सारी जवाबदेही संगीता कुलकर्णी पर सौंपी गई है. श्रीमती कुलकर्णी ने जैव प्रौद्योगिकी के दूत के रूप में काम किया है. जैव प्रौद्योगिकी विषय में ज्ञान प्रबोधिनी में आठवीं कक्षा से सिखाया जाता है. अब तक १५००  से अधिक छात्रों ने जैव प्रौद्योगिकी विषय में ज्ञान प्राप्त किया है क्योंकि उन्हें आकर्षक पद्धति से यहां पर सिखाया जाता है.
 किसान बचत और ग्राम वासियों में भी इसकी लोकप्रियता को बढ़ावा देने में संगीता कुलकर्णी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. उनके अलावा इस श्रेणी में अन्य 2 लोगों को भी यह पुरस्कार दिया गया.
 प्रौद्योगिकी का उपयोग विकास के लिए करें- राष्ट्रपति कोविंद
कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि भारत ने परमाणु बम का सफलतापूर्वक परीक्षण करके विश्व स्तर पर अपने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में माहिर होने का डंका पीटा. भारत ने हमेशा शांति और विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है और आगे भी इसी के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग होगा ऐसी अपेक्षा उन्होंने यहां पर जताई. मेडिकल कृषि तथा अन्य क्षेत्र में टेक्नोलॉजी की वजह से सामान्य लोगों को काफी लाभ हुआ है और आज 21 वे सदी में हमारे सामने अनेक चुनौतियां खड़ी है जिसका उत्तर प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में काम करने वाले ही दे सकते हैं. उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे भारतीयों के लिए सरल और सुविधाजनक प्रौद्योगिकी का विकास करें. इस क्षेत्र में महिलाओं के आने की अधिक आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि नव प्रौद्योगिकी के विकास के कारण ही भारत के साथ ही समूचे विश्व का भी रूप बदल सकता है. केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने भी इस समय अपने मनोगत व्यक्त किए.

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