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होंगे- डॉ0 दयाराम, डीआरपीसीएयू में तीन दिवसिय प्रशिक्षण सम्पन्न

समस्तीपुर। गरीबी एवं कुपोषण को दूर करने के साथ साथ लघु व भूमिहीन किसानो खास कर घरेलू महिलाओं के आर्थिक स्वाबलंबन  में मशरूम की एक अहम भूमिका है। तथा इसे सामूहिक प्रयास से और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। मशरूम मैन के नाम से विख्यात मशरूम  वैज्ञानिक डा0 दयाराम ने उक्त बातें मशरूम उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षुओं से कही। उन्होने कहा कि मशरूम से नमकीन, बिस्किट, समोसे, मिठाईयाँ आदि उतपादन तकनीक का सफल प्रयोग करने के बाद हम इसके ब्रांडिंग पर कार्य कर रहे हैं। शीघ्र ही राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मशरूम के उत्पाद उपलब्ध होंगे। इससे मशरूम उत्पादकों को और अधिक फायदा होगा। बताते चलें कि डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय पूसा स्थित गृह विज्ञानं विभाग के सभागार में बुधवार को मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर  के समापन सत्र का डीआरपीसीएयू पूसा के बेसिक साइंस विभागाध्यक्ष डॉ0 अशोक कुमार सिंह ने विधिवत उद्घाटन  किया। अपने उद्घाटन सम्बोधन में श्री सिंह ने प्रशिक्षुओं से कहा कि  सेहत से भरपूर मशरूम आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा परिवारिक व सामाजिक सशक्तिकरण का सरल माध्यम है। विदित हो कि मशरूम उत्पादन तकनीक प्रसार कार्यक्रम के तहत आयोजित तीन दिवसिय प्रशिक्षण मे करीब 80 दलित व आदिवासी महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षु प्रियंबदा के स्वागत गीत व पुष्प गुच्छ से अतिथियों के स्वागत के बाद समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ0 सिंह ने कहा की मशरूम उत्पादन व प्रसंस्करण का व्यवसाय कम पढ़े लिखे विद्यार्थियों व किसानों के अलावे अल्प भूमि वाले आदिवासी किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प है। मशरूम उत्पादन से समृद्धी की ओर बढ रही बाँका जिले की विनिता कुमारी व जमूई जिले के मोहन कुमार केशरी ने अपने अनुभव प्रशिक्षुओं से साझा किये। उन्होंने कहा कि भुमिहीन किसान इसे व्यवसाय के रूप मे अपना कर बेहतर मुनाफा अर्जित करते हुए अपने परिवार में खुशहाली ला सकते है। श्रीमति विनिता ने कहा की कृषि विवि पूसा मशरूम उत्पादन व प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी लंबे समय से कार्यरत है, साथ ही करीब 30 हजार से अधिक किसान भी यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन व उनसे जुड़े विभिन्न व्यवसायों को अपनाते हुए बेहतर मुनाफा हासिल कर रहे है। उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे छात्राओं व किसानों से अपील किया कि वे अपने गांव में जाकर लोगो को मशरूम के फायदे तथा इसके उत्पादन के बारे में बताएं। डॉ0 दयाराम ने बताया कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर में समस्तीपुर 20 महादलित, सहरसा सुपौल व जमूई जिलों के 60 आदिवासीयों ने प्रिशक्षण लिया। मौके पर निदेशक प्रसार विनय कुमार वर्मा के अलावे विवि के कई अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।

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