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-घटना दर घटना के बाद भी सुरक्षा के नहीं हुए व्यापक प्रबंध

मीरजापुर,हिन्दुस्तान की आवाज, संतोष देव गिरी

मीरजापुर। पतित पावनी मां गंगा की अरावली गोद में विद्यमान शक्तिपीठ मां विंध्यवासिनी की पावन नगरी में आने वाले दूर दराज के दर्षनार्थियों के लिए यहां के गंगा घाट उनके लिए मौत का कारण बन रहे हैं। जिसका असर यह है कि बहुत से भक्त यहां आने पर गंगा में गोते लगाने से कतराते हैं। गौर करे तो अब तक कितने ही परिवार के दीपक बुझ चुके हैं तो कितने परिवारों की खुषियां पल भर भी काफूर हो गई हैं। जो आये तो यहां थे मन्नत मानने लेकिन मातम के साथ वापस गए हैं। विंध्यधाम के गंगा घाटों पर श्रद्वालूओं के असमय काल कवलित हो जाने की बढ़ती घटनाओं से स्थानीय लोग भी खासे चिंतित हैं। विंध्यधाम आने वाले  सैकड़ों की संख्या में दूर-दराज से आने वाले दर्षनार्थी मां के धाम में पूजन अर्चन से पूर्व गंगा में गोते लगाना नहीं भूलते हैं। लेकिन हाल के दिनों गंगा नदी में डूबने की बढ़ती घटनाओं से गंगा स्नान करने में भय सताने लगा है। गौरतलब है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में मां विंध्यवासिनी की पावन नगरी में श्रद्धालुओं एवं यात्रियों का आवागमन होता रहता है। विंध्य धाम में आने वाले यात्री मां गंगा की गोद में स्नान कर अपने आप को पापों से मुक्त कर धार्मिक अनुष्ठान पूजन मां विंध्यवासिनी देवी के मंदिर में कर अपनी मंगलकामनाओं के साथ अनुष्ठान किया करते हैं। मंदिर परिषद के उत्तर दिशा में स्थित गंगा नदी के प्रमुख घाटों के रूप में पक्का घाट इन दिनों का जर्जर हो चुका है जिसकी सीढ़ियां किसी बड़े हादसे को दावत दे रही हैं जहां आने वाले यात्रियों के लिए मौत मानो साक्षात खड़ी रहती है। जरा सी चूक हुई नहीं की जान गई ऐसी यहां की स्थिति हो चली है। प्रषासनिक लापरवाही के कारण नमामि गंगे योजना एवं गंगा प्रदूषण बोर्ड द्वारा कई योजनाएं भारत सरकार द्वारा संचालित की गई हैं लेकिन यहां सबकुछ धरातल पर दिखई नहीं देता है। बात करे सुरक्षा की या साफ सफाई से लेकर अन्य की सब हवा हवाई चल रहे है। दर्षनार्थियों की सुरक्षा को लेकर बाते भी अक्सर खूब होती हैं खासकर नवरात्र मेला प्रारंभ होने से पूर्व दावे खूब होते हैं, लेकिन नवरात्र बीतते ही सबकुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। यहां कारण है कि यहां आने वाले तमाम भक्तगण भी विंध्यधाम स्थित गंगा घाटों की दषा देख बुझे मन से वापस जाते हैं। नगर पालिका परिषद की उदासीनता के कारण पक्के घाट की जर्जर सीढ़ियों के कारण आये दिन दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। गंगा घाटों पर स्नान ध्यान करने वाले यात्रियों के साथ उनके परिजन भी गंगा स्नान करते समय अपने आप को असुरक्षित महसूस करते नजर आते हैं। बताते चले कि पूर्व में प्रदेष की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के समय में पक्के घाट के सुंदरीकरण के बड़े बजट की कार्य योजना तैयार कर कार्य कराया गया था। लेकिन सत्ता परिर्वतन होने के बाद अन्य सरकारों की उदासीनता के कारण धार्मिक नगरी विंध्याचल के घाट जर्जर स्थिति में पहुेचने के साथ अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवष है। स्थानीय लोगों की माने तो गंगा घाटों पर सफाई व्यवस्था दुरुस्त ना होने के साथ पक्के घाट पर स्मृति चिन्ह के रूप में बना जल पुलिस चैकी भी अपनी बदहाली का रोना रो रहा है। जिसकी बदहाली किसी से छुपी हुई नहीं है। विंध्याचल के गंगा घाटों की बात करें तो पक्का घाट, इमली घाट, गोदारा घाट, बाबू घाट, परशुराम घाट समेत अन्य कई घाटों पर गंगा स्नान करते समय यात्रियों के साथ कई घटनाएं घटित हो चुकी हैं। यहीं कारण है यहां आने वाला हर एक दर्षनार्थी सषंकित दिखलाई देता है।


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