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ग्राम सभा के तालाब पर बसी बस्ती को न्यायलय के आदेश पर किया गया ध्वस्त

  तालाब के रकबा मे बनाये गये सभी मकान ढहाये गये!   जिस समय जेसीबी के द्वारा मकानो के गिराने का कार्य चल रहा था तभी किसी सरारती ने एक घर मे आग लगा दी जिससे स्थिति और भी गम्भीर हो गयी वही कुछ लोग अपने घरों से सामान नाम मात्र का ही निकाल सके थे बाकी आग की भेट चढ गया! मानवता उस समय शर्मसार हुई जब  कुछ ग्रामीणो के मकान आग मे जल रहे थे! उस समय उस मकान की आग बुझाने के बजाय! उप जिलाधिकारी करछना उन मकानो को जेसीबी से गिरवाने मे लगे हुये थे!  क्यो कि उन्हें न्यायालय के आदेश का पालन जो करना था! अपितु कौधियारा मे केवल यही बस्ती तालाब पर नही बसी हुई है!  माँही ग्राम सभा मे तालाबी रकबा पर कब्जा कर के खेती की जा रही है तो कुखुडी मे भी तालाब पर स्कूल व घर बनाये गये है! तो वही नेचुना ग्राम सभा मे तालाब पर ही इन्द्रा आवास बनाये जा रहे है. लेकिन सायद तहसील प्रशासन को व न्यायालय को ये सब नही दुख रहे है! जो इस चिलचिलाती धूप मे इन गरीबो के घर गिरा कर खुले आसमान के नीचे ला कर खडा कर दिया!  क्या यह उस समय नही सोचा गया था जब गाँव के ही लोगो के द्वारा बोट के लिये यह बस्ती बसाई गयी थी

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