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-शासन का निर्देश एबीएसए के सामने पड़ा फीका

मीरजापुर,हिन्दुस्तान की आवाज, संतोष देव गिरी

मीरजापुर। जिले के मड़िहान तहसील क्षेत्र में दर्जनों कान्वेंट स्कूल बिना मान्यता के धड़ल्ले के साथ संचालित हो रहे हैं। जिनके आगे सारे कायदे कानून बौना साबित हो रहे है। बताया जाता है कि बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय पर मड़िहान एबीएसए की कृपा दृष्टि बनी हुई है जिससे शासन के तमाम निर्देश के बावजूद भी ऐसे विद्यालयों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहाा है। शासन के फरमान को अलम में लाने का दायित्व संभालने वाले जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से उदासीन बिने हुए हैं। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के कारण बगैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को इन दिनों खुली छूट प्रदान कर रखे है। क्षेत्रीय लोगों ने एबीएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह सबकुछ एबीएसए की मिलीभगत से हो रहा है जो अपने निजी स्वार्थ के चक्कर में बगैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को लूट की खुली छूट दे रखे हैं। जिसका असर यह है कि शिक्षा माफियायों की धड़ल्ले से चल जहां दुकानदारी चल रही है वहीं अभिभावक परेशान नजर आ रहे है। शिक्षा का मन्दिर कहा जाने वाला विद्यालय शिक्षा माफिया का व्यवसाय बन चुका है ऐसे में छात्रों के दाखिले को लेकर अभिभावक परेशान हो रहे हैं। मनमाना फीस लिए जाने का मामला तो वर्षों से लोगों को साल रहा है। इससे भी पेट नही भरा तो स्कूलों से किताब लेने के लिए बाध्य किया जाने लगा है। स्कूल की तय दुकानों से यूनिफार्म भी मिलेगा। ऊँचे दामो पर किताब खरीदना बड़ी बात तो है विवषता तो तब होती है जब प्रति वर्ष किताबें बदल दी जाती है। एड्मिशन के नाम पर धन उगाही का तो कुछ पूछना ही नहीं है। दूसरी तरफ यह समझ में नहीं आता कि विद्यालय है या दुकान। नर्सरी से लेकर माध्यमिक शिक्षा की किताबें हजार से दो हजार रुपये कीमत पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं। इन दिनों मड़िहान के तिसुही स्थित एक नामी गिरामी स्कूल का मामला चर्चाओं मंे है। सत्ताधारी दल से ताल्लुकात रखने वाले सफेदपोस नेता के विद्यालय में बोलना तो दूर कुछ कहने से पहले भी सौ बार सोचने को विवष होते है। शिकायत करने की यदि कोई हिम्मत जुटाता है तो उससे पहले फर्जी मुकदमे में फसाने की धमकी दी जाती है।



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