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भिवंडी।एम हुसेन। जैन समाज के चातुर्मास में साधू-साध्वी के प्रवास के लिये राज्य सरकार द्वारा अनुमति मिलते ही भिवंडी के श्री बिहार सेवा ग्रुप द्वारा अपनी सेवायें देना शुरू कर दिया गया है। बिहार सेवकों द्वारा शनिवार को पांच बिहार कराया गया है , जिसमें बिहार सेवकों के 20 सदस्यों द्वारा 29 साधू-साध्वी को बिहार कराकर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया गया ।
   ज्ञात हो कि जुलाई महीने में जैन समाज का चातुर्मास शुरू होने वाला है, जैन साधू-साध्वी के चातुर्मास में प्रवास करने के लिये चातुर्मास स्थल निश्चित रहता है, जहां तक वे पैदल चलकर जाते हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका प्रवास बंद था, जैन समाज की मांग पर राज्य सरकार द्वारा कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुये प्रवास करने की अनुमति दे दी गई  है।जिसमें पैदल प्रवास करते समय भीड़ नहीं होना चाहिये और  5 व्यक्तियों से अधिक एकसाथ प्रवास नहीं कर सकते हैं। जैन साधू-साध्वी को जहां प्रवास करना है वहां भी भीड़ नहीं होना चाहिये। प्रवास के समय सभी लोगों को मास्क पहनना एवं  सामाजिक अंतर का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
  भिवंडी के श्री बिहार सेवकों के 5 ग्रुप द्वारा 29 साधू-साध्वी को प्रवास करने के लिये बिहार कराया गया है।  जिसमें एक ग्रुप द्वारा ठाणे के कासार वडवली से जैन साधू-साध्वी को बिहार कराकर काल्हेर पहुंचाया गया। दूसरे ग्रुप द्वारा कासार वडवली से माजीवाड़ा पहुंचाया गया, तीसरे ग्रुप द्वारा मानपाड़ा से काल्हेर,चौथे ग्रुप द्वारा काल्हेर से अंजुरफाटा एवं पांचवे ग्रुप द्वारा माजीवाड़ा से मानपाड़ा में बिहार कराया गया।
   बतादें कि जैन साधू-साध्वी को प्रवास कराने के लिये भिवंडी में 250 लोगों के बिहार सेवकों का मॉर्निंग एवं इवनिंग का दो ग्रुप है।बिहार सुबह-शाम कम से कम दो घंटा पैदल चलकर साधू-साध्वी महाराज को बिहार कराते हैं।जो साल के आठ महीने रोजाना सुबह चार बजे उठकर साधू-साध्वी महराज को प्रवास करने में लग जाता है।
 भिवंडी के बिहार सेवक भिवंडी से ही नहीं ठाणे,कल्याण,डोंबिली,काल्हेर,शाहपुर सहित अन्य क्षेत्रों  में प्रवास करने वाले साधू-साध्वी को बिहार कराते हैं। इसमें से कुछ बिहार सेवक ऐसे हैं जो लोनावाला तक बिहार कराने की सेवायें दे चुके हैं।लोनावाला एवं अन्य दूरदराज  क्षेत्र  में प्रवास करने वाले साधू-साध्वी के बिहार के लिये भिवंडी के सेवक सूचना मिलने पर एक दिन पहले ही वहां पहुंच जाते है। बिहार सेवकों में 18 वर्ष की उम्र से 60 वर्ष की उम्र के लोग शामिल हैं ।भिवंडी के प्रकाशचंद जैन (60) ठाणे ही नहीं भारत के सबसे वृद्ध बिहार सेवक हैं,जो साल के आठ महीने लगातार सुबह चार बजे उठकर साधू-साध्वी म.सा. को बिहार कराने की सेवा देते हैं। लगभग 11 वर्ष पहले भिवंडी में श्री बिहार सेवा ग्रुप शुरू कराने वाले महाबोधि म.सा.जहां भी प्रवास करते हैं वहां बिहार सेवक प्रकाशचंद के बिहार सेवा की चर्चा जरूर करते हैं । 
   भिवंडी के श्री बिहार सेवा ग्रुप में शामिल होने के बाद कई लोगों की जीवनशैली बदल गई है। जिन्हें धर्म में कोई रूचि नहीं थी, कभी मंदिर नहीं जाते थे, लेकिन साधू-साध्वी महाराज को बिहार कराने के कारण उन लोगों की जीवनशैली ही बदल गई है। वे लोग धार्मिक कामों में बढ़चढ़कर  भाग लेने लगे हैं। बिहार सेवक बताते हैं कि उन्हें महराज साहेब का प्रवचन सुनने का समय नहीं मिल पाता है।लेकिन म.सा. के बिहार के दौरान उन्हें लगभग दो घंटे तक सीखने का अवसर मिलता है।जो जिज्ञासा रहती है उसकी भी जानकारी मिलती है और म.सा. अलग से भी कुछ बताते रहते हैं ।   
 


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