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कोरोना कितना घातक है जन-जन को बतलाओ तो

देश के कई नामचीन साहित्यकारों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की सहभागिता

पूरे कवि सम्मेलन में छाया रहा कोरोना संकट को हराने का संकल्प

शाहजहांँपुर। बुधवार को प्रयास जन सेवा समिति की ओर से एक ऑनलाइन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
जिसमें देश के कई नामचीन कवियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कविता पाठ करके समा बाँध दिया।
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देश की दशा और दिशा पर भी कवियों ने चिंता जाहिर की।

भयंकर कोरोना महामारी को झेल रहा पूरा विश्व जहाँ त्राहिमाम कर रहा है वहीं भारत में लोग तरह तरह से अपने समय का सदुपयोग कर कोरोना वायरस को हराने के लिए जन जागरण अभियान चला रहे हैं ।
कोरोना जैसी भयंकर महामारी से जंग के लिए आजकल भारत में 21 दिन का लाॅक डाउन चलाया जा रहा है।
जिसमें प्रतिदिन क़लमकार भी समाचार पत्र दूरदर्शन के अलावा सोशल मीडिया पर भी बखूबी जन जागरण कर रहे हैं।
जिसमें देश के लघु रचनाकारों की भूमिका भी किसी मायने में कम नहीं है। जहाँ तक प्रश्न बड़े रचनाकारों का है तो कुछ मुद्रा राक्षसों को छोड़कर शेष शत- प्रतिशत साहित्यकार कोरोना की इस जंग में जन जागरण कर अपने कवि धर्म  का निर्वहन उसी तरह कर रहे हैं ।
जिस तरह  डॉक्टर पुलिस और मीडिया के योद्धावीर।
देश पर जब -जब संकट के काले बादल छाए हैं क़लाकारों ने क़लम उठा कर लोगों को जगाने के लिए दिन रात एक कर दिया ।
इसी श्रंखला में सबके संकट हरने वाले महाबली हनुमान जी के प्रकटोत्सव पर बुधवार को जनपद के चर्चित राष्ट्रवादी युवा कवि प्रदीप वैरागी के संयोजन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य कोरोना वायरस कोविड 19 को मिटाने के लिए बाबा बजरंगबली से आवाहन करके हनुमान चालीसा की कालजयी पंक्तियाँ  " नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत वीरा।" और उनकी कामना साकार करने के लिए यह कार्यक्रम रखा गया था।

कमलकांत "सागर" की वाणी वंदना से शुभारंभ हुए कार्यक्रम
की अध्यक्षता मानव चिकित्सा सेवा से जुड़े ओज़कवि  रामबाबू शुक्ला ने की उन्होंने  कहा,"
निष्ठुर भावों के हिम खंडों को थोड़ा पिघलाओ तो
मानव हो तो यही समय है मानवता दिखलाओ तो।
जागो उठो जगाओ सबको कोरोना से लड़ने को ,
कोरोना कितना घातक है जन-जन को बतलाओ तो।।
बलरामपुर से शामिल हुए देश के चर्चित युवा बालकवि गौरव बाजपेई स्वप्निल ने कहा,"दुर्दशा दुरूह दुर्भाग्य पे माँ भारती के
एक-एक नयन में नीर होना चाहिए।
क्लीव पुरुषार्थहीन नहीं चाहिए अनेक
एक ही हो नेता किन्तु वीर होना चाहिए।।
गाजि़याबाद से शामिल हुए, अतर सिंह "प्रेमी "ने आज की हकीकत बयां करते हुए कुछ यों कहा,"
रिश्ते आज अपंग दिखाई देते हैं
दिल भी कितने तंग दिखाई देते हैं
संबंधों की फुलवारी में छिपे हुए
बैठे आज भुजंग दिखाई देते हैं।"
झुमका शहर बरेली की युवा कवयित्री ने सुनाया, "जाऊंँगा कैसे अवधपुरी मैं,लेके अपना लज्जित मुखड़ा।
मात सुमित्रा पूछेगी मुझसे,कहाँ है मेरे
ज़िगर का टुकड़ा।
माँ का आँचल हो न सूना,उर्मि का दुःख हो न दूना।
बच जाए मेरे लखन का जीवन,
हनुमत ले आओ संजीवन।
बंडा से शामिल हुए युवा कवि रोहित शुक्ला सहज ने कहा,
"भारत में लेकर जन्म जहाँ, वीरों ने शान दिखाई है ।
रण कर भूमि से प्रकट हुई, वो रानी लक्ष्मीबाई है ।
सभ्यता जहाँ से जन्मी है, वो हिन्द मेरा मतवाला है ।
संस्कार जहाँ से पले- बढ़े वो भारत देश निराला है ।
फैशन ने लूटा भारत को, और इंडिया इसे बनाया है ।
फैशन ने आकर भारत में, संस्कृति का नाम डुबाया है ।
हास्य कवि  संजय अकेला ने  कहा ,"जो थे अँगूठा छाप वो विद्वान हो गये ।
गुण्डे औ' माफिया सभी महान हो गये।
जो   घोटालेवाज  और  बेईमान  थे,
वो हमारे गाँव के प्रधान हो गये।"
नवोदित रचनाकार हिमांशु शुक्ला ने कहा,
"जो मन के प्रकाश को छू ले मीत वही है
मन के अंतस से जो निकले गीत वही है।"
मुरादाबाद की युवा कवयित्री स्वदेश सिंह ने कहा,
"हमने खाई है कसम
भारत को जिताएंगे
कोरोना को मारकर
विश्व गुरू बन जायेंगे।
जनपद के सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार संदीप गुप्ता ने कहा,
"जो लोग कर रहे जमातियों की हिफाजत ।
हैं, राष्ट्र द्रोही कर रहे लाशो पे सियासत।
थाली में छेद कर रहे गद्दार तुम्ही हो।
अब आ रही करीब है तुम्हारी कयामत ।।
इसके अलावा बरेली से वरिष्ठ कवि और साहित्यकार एसके कपूर श्री हंस बीसलपुर से विकास प्रधान शाहजहाँपुर से वीएस मिश्रा ,कमलकांत सागर, नरेश चंद्र बाजपेई
आदि ने भी काव्य पाठ किया। तकनीकी कारणों से रात्रि के समय रात्रि काल में कवि सम्मेलन को कई बार रोकना भी पड़ा। देर रात तक चले ऑनलाइन कवि सम्मेलन को को लोगों ने इंस्टाग्राम पर भी देखा।आॉनलाइन कवि सम्मेलन के आयोजक प्रयास जन सेवा समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सुबोध कुमार ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, कोरोना महामारी के विश्व संकट की इस घड़ी में कलम कारों ने ऑनलाइन कवि सम्मेलन के माध्यम से कुछ समय के लिए एक चिंता मुक्त वातावरण तैयार कर अपनी अहम भूमिका निभाई है। हम सभी का हृदय से कोटि-कोटि आभार व्यक्त करते हैं ।और सभी के उज्जवल भविष्य की कामना के साथ सभी से लॉकडाउन में घर से ना निकलने की अपील करते हैं।
क्योंकि कोरोना की जंग घर में रहकर ही जीती जा सकती है। ऑनलाइन कवि सम्मेलन संचालन में तकनीकी सहयोग श्याम मोहन मिश्रा का रहा।संचालन प्रदीप वैरागी ने किया।

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