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भिवंडी। एम हुसेन । श्री राजस्थान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में भिवंडी के भगवान महावीर रोड स्थित महावीर भवन के गुरु श्रेष्ठ पुष्कर देवेंद्र दरबार में विराजित राष्ट्रसंत दक्षिण सम्राट श्री नरेश मुनिजी ने पर्युषण को महान पर्व बताते हुए कहा कि यह वह महान पर्व है जो हमारी आत्मा को निर्मल करता है और हमारी भावदशाओं को पवित्र करता है। हमारी विचार धाराओं को निर्मल करता है। हमारे तन,मन,वाणी एवं विचार सब को निर्मल करता है। जैसे साबुन कपड़े को धोकर साफ़ कर देता है। ऐसे ही पर्युषण पर्व हमारे तन,मन एवं आत्मा को पवित्र करता है।
  दक्षिण सम्राट श्री नरेशमुनि ने कहा कि पर्युषण पर्व तो अष्टसिद्धि एवं नौ निधि देने वाला है। उन्होंने कहा यों तो भारत में इतने सारे पर्व हैं कि शायद ऐसा कोई दिन नहीं होगा जब भारत में कोई पर्व नहीं हो। लेकिन पर्युषण पर्व अपने आप में एक विलक्षण पर्व है। प्रखर वक्ता श्री शालिभद्रजी म.सा. ने अंतगढ़ सूत्र का बहुत ही सुंदर ढंग से वाचन किया। उन्होंने बताया कि इसमें 90 आत्माओं का वर्णन इस सूत्र में है। यह न तो दिया जलाने का पर्व है, न ही यह रंग उड़ाने का पर्व है और न ही मिठाइयां बाटने का पर्व है। यह अपनी आत्मा को सजाने का पर्व है, उन्होंने बहुत ही सुंदर गीतिका प्रस्तुत किया।
 डॉ.दर्शनप्रभाजी म.सा. ने कहा कि पर्युषण आठ दिन चलने वाला पर्व है। यह केवल बाहर से चमकीले कपड़े पहनने का दिन नहीं है,रोशनी करने का दिन नहीं है, यह तो अपने आपको चमकाने का पर्व है,अपने आपको माजने का पर्व है। इस दौरान मधुर गायिका साध्वी श्री समृद्धिजी ने पर्युषण पर्व पर बहुत सुंदर भजन प्रस्तुत किया। डॉ. मेघाश्री जी ने बहुत ही सुंदर ढंग से कल्पसूत्र का वाचन किया। लक्ष्मीलाल दोषी ने बताया कि दोपहर में ये रिश्ता क्या कहलाता है प्रतियोगिता हुई। व्याख्यान हाल समाईक करने वालों से पूरा भरा था। कार्यक्रम का संचालन संघमन्त्री अशोक बाफना ने किया।  

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