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मीरजापुर। बहु प्रतीक्षित बाणसागर नहर परियोजना का पानी मध्य प्रदेश सीमा से सटे हुए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपद के किसानों के लिए छलावा साबित होने लगा है जिससे यहां के किसान 2 राज्यों के बीच उलझ कर रह गए हैं। वजह है मध्य प्रदेश की हठधर्मिता जो बाणसागर डैम से पानी दिए जाने को लेकर गंभीर नहीं है किससे उत्तर प्रदेश के खासकर मीरजापुप जनपद के किसानों को काफी परेशान होना पड़ जा रहा है। बाणसागर डैम से पानी नहीं दिए जाने का मामला मामूली नहीं है। चुप्पी के चलते ही यह परियोजना 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस' मुहाबरे को साकार करने में सफल रही और 42 साल के बाद लोकार्पित इस परियोजना में 'जबरा मारे रोए न देय' को नजर अंदाज किया गया तो अंजाम क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 16 अक्टूबर को सिंचाई सचिव राजमणि यादव के बाद 18 अक्टूबर को सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव टी वेंकटेश से कमिश्नर ने बात की किए थे। उन्होंने प्रमुख अभियन्ता, लेबिल-2 राकेश शर्मा को कार्यालय बुलाया लेकिन वे लखनऊ थे। उन्होंने 3 अक्टूबर को मध्यप्रदेश को लिखे डिमांड लेटर की कॉपी भिजवाई। जिसके अनुसार एक साथ पूरा पानी मांगा भी नहीं गया है। 15 अक्टूबर से 100 क्यूसेक तथा 21 अक्टूबर से 300 तथा 28 अक्टूबर से 500 क्यूसेक पानी मांगा था। जो अनुबंध का 33 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। कारण कि यहां के डैम जितने खाली हैं, उतने भर जाए। बाणसागर नहर परियोजना का पानी जितना लोगों के लिए शहर प्रतीत हो रहा था उतना ही अप कठिन दिखने लगा है यही कारण है कि यह मुद्दा जिले में हलचल का विषय बना हुआ है। कई  लोग इस मामले को लेकर जिलाधिकारी अनुराग पटेल से मिले उनके संज्ञान में पहली बार मामला आते ही उन्होंने पत्राचार शुरू किया। जिलेे कि सांसद तथा
केंद्रीय राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल जिनकी उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले में महीने इसका लोकार्पण कट चुके हैं ने भी हस्तक्षेप का भरोसा दिया है। लब्बोलुबाब हफ्ते-दस दिन के भीतर विवाद का निबटारा इस तरह हो कि आगे एग्रीमेंट का उल्लंघन नहीं होगा। बहरहाल देखना यह है कि जिले के सांसद तथा जिले के अधिकारियों का प्रयास किस हद तक सफल हो पाता है।

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