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संकटमोचन मंदिर मे एक षट: निशिय संगीत समारोह आयोजित।

 वाराणसी। काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ ये सभी हमारे जीवन में विष हैं इनका अपने जीवन में शमन करते हुए जीवन यापन करना ही श्वत्व या कृष्णत्व को प्राप्त करना है। इसमे संगीत की अहम् भूमिका है। उक्त बातें पद्म विभूषण नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने आस्था की पावन धरती वाराणसी स्थित संकटमोचन मंदिर मे हनुन्नजयन्तिं के मौके पर आयोजित एक छ: निशिय संगीत समारोह मे उपस्थित संगीत सुधि श्रोताओं से कही। आयोजन की प्रथम प्रस्तुति के दौरान श्रीमति मानसिंह ने कहा कि अपने अंदर व्याप्त बुराई रूपी विष का अन्त कर पर्यावरण को स्वस्थ बनाने प्रयास शिवत्व की प्राप्ति की ओर प्रयास है। उन्होने कहा कि  हमारे अंत:करण मे ही शिवत्व व कृष्णत्व विद्यमान हैं बस उन्हे जागृत करे की जरूरत है। बताते चलें कि शिव की नगरी भारत की मौजूदा सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में  संकटमोचन संगीत समारोह देश विदेश से आनेवाले नामचीन कलाकारो का महासम्मेलन संगीत रसिकों केलिये पर्व का स्वरूप ले चुका है। देश के कोने कोने से ही नहीं विदेश से भी कलाकार व सुधि श्रोताओं का अद्भुत स्गम होता है यहाँ। यकीनन यह
एक अनोखा व आयोजन है क्योंकि षट निशीय इस सम्पूर्ण आयोजन में न कोई अध्यक्ष होता है न ही मुख्य अतिथि सब कुछ एक मे सन्निहित सब उन्ही एक को समर्पित हनुमंत बाबा को। इसी विलक्षण आयोजन में बुधवार को पद्म विभूषण डॉ0 सोनल मानसिंह एवं उनके शिष्य मंडली, की भाव पूर्ण भरतनाट्यम के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ।बाद में अनूप जलोटा, सोनू निगम, रतन मोहन शर्मा, मालिनी अवस्थी, (सभी गायन) रोनू मजूमदार, बांसुरी, साथ बनारस घराने के सच्चे प्रतिनिधि संजू सहाय, व रामकुमार मिश्र की थिरकती उंगलियों के संगति में पहली निशा झूमती रही।

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